Himachal: अब ढीले ठेकेदारों की खैर नहीं! CM सुक्खू का बड़ा ऐलान—काम में देरी हुई तो रद्द होंगे कॉन्ट्रैक्ट

हिमाचल प्रदेश में सड़कों के निर्माण में हो रही देरी को लेकर सरकार अब सख्त रुख अपनाने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में स्पष्ट कहा कि भविष्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत ठेके केवल उन्हीं ठेकेदारों को दिए जाएंगे, जिनकी तकनीकी और वित्तीय क्षमता मजबूत होगी। यह फैसला राज्यभर में सड़कों के अधूरे और धीमी गति से चल रहे कार्यों को देखते हुए लिया गया है।

प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली के कारण कई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाईं। अब ठेकेदारों की क्षमता की सख्ती से जांच की जाएगी और काम की लगातार निगरानी होगी, ताकि समय सीमा का पालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जो ठेकेदार तय समय पर काम पूरा नहीं करेंगे, उनके ठेके रद्द कर दिए जाएंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि पिछली भाजपा सरकार के दौरान कुछ परियोजनाएं फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (FDR) जैसी शर्तों के साथ दी गई थीं, लेकिन कई ठेकेदार, खासकर जो पहाड़ी क्षेत्रों से परिचित नहीं थे, काम समय पर पूरा नहीं कर पाए। सदन में रखे गए आंकड़ों के अनुसार, पीएमजीएसवाई-III (2023-24) के तहत देहरा क्षेत्र में कई सड़क परियोजनाएं अभी भी अधूरी हैं। कुछ परियोजनाएं 70 प्रतिशत तक पहुंच चुकी हैं, जबकि कई 50 प्रतिशत पर रुकी हुई हैं और एक परियोजना तो सिर्फ 15 प्रतिशत ही पूरी हो पाई है। इन सभी को अब जुलाई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

लोक निर्माण विभाग के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि विभाग ठेकेदारों के आंतरिक विवादों में हस्तक्षेप नहीं करता, लेकिन समय पर काम पूरा करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने भी चेतावनी दी कि देरी होने पर ठेके रद्द किए जाएंगे।

इस मुद्दे पर कई विधायकों ने भी चिंता जताई। संजय रतन और कमलेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर सड़कें अधूरी पड़ी हैं, जिससे धूल और परेशानी बढ़ रही है। वहीं, विधायक आई.डी. लखनपाल ने तवी मोड़ और टुटू के बीच सड़क की खराब हालत को लेकर दुर्घटनाओं की आशंका जताई। इस पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने विभाग को तुरंत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।

अन्य विधायकों ने भी अपने क्षेत्रों में धीमी प्रगति और एक ही ठेकेदार को बार-बार काम दिए जाने पर सवाल उठाए। अनुराधा राणा ने सीमा सड़क संगठन (BRO) को चेतावनी दी कि अगर एक ही ठेकेदार को काम मिलता रहा, तो वे विरोध करेंगी। यह पूरी बहस इस बात को दिखाती है कि ग्रामीण सड़क परियोजनाओं में देरी को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों गंभीर हैं।

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