Himachal: हिमाचल की बिगड़ती आर्थिक हालत पर केंद्र से बड़ी मांग, विशेष पैकेज और सेब पर 100% आयात शुल्क की उठी आवाज

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य को गंभीर वित्तीय संकट से उबारने के लिए केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक पैकेज जारी करने की मांग की है। इसके साथ ही केंद्रीय योजनाओं में प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ाने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया है। यह मांग तकनीकी शिक्षा एवं टीसीपी मंत्री राजेश धर्माणी ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों की बजट पूर्व परामर्श बैठक के दौरान रखी।

राजेश धर्माणी ने कहा कि प्रदेश में मानसून के दौरान हुई भारी बारिश से व्यापक तबाही हुई है, जिसकी भरपाई के लिए केंद्र सरकार को तत्काल वित्तीय सहायता उपलब्ध करवानी चाहिए। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज को भी शामिल करने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए फंड आवंटन में मैदानी राज्यों जैसे मापदंड लागू करना न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि यहां सड़क निर्माण और अन्य विकास परियोजनाओं की लागत कई गुना अधिक होती है।

बैठक में राजेश धर्माणी ने हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान को बढ़ाने की भी मांग की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में प्रदेश को 10,257 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिलता था, जो वर्ष 2025-26 में घटकर मात्र 3,257 करोड़ रुपये रह गया है। इसके अलावा उन्होंने बीबीएमबी परियोजनाओं में हिमाचल की 12 प्रतिशत हिस्सेदारी और करीब 4,500 करोड़ रुपये के लंबित एरियर को जल्द जारी करने की मांग की।

उन्होंने यह भी कहा कि जून 2022 से जीएसटी मुआवजा बंद होने के कारण राज्य को हर साल करीब 2,600 से 2,700 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है, जिसकी भरपाई केंद्र सरकार को करनी चाहिए। इसके साथ ही कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना लागू करने के चलते केंद्र की ओर से मिलने वाली 1,770 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी को फिर से बहाल करने की मांग भी रखी गई।

राजेश धर्माणी ने रेल, फोरलेन, राष्ट्रीय राजमार्ग और रोपवे जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए उदार वित्तीय सहायता देने का आग्रह किया। उन्होंने भानुपल्ली-मनाली-लेह और चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण का खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने की मांग की।

इसके अलावा सेब बागवानी को राहत देने के लिए उन्होंने आयातित सेब पर शुल्क बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि विदेशी सेब के कारण राष्ट्रीय बाजार में हिमाचली सेब के दाम तेजी से गिरे हैं, जिससे बागवानों को भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे में आयात शुल्क बढ़ाने के साथ-साथ सेब को ओपन जनरल लाइसेंस की सूची से बाहर किया जाना जरूरी है।

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