Kangra: धर्मशाला में बना हिमाचल का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क, नवंबर में सीएम सुक्खू करेंगे उद्घाटन

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धर्मशाला, 28 अक्टूबर 2025: हिमाचल प्रदेश जल्द ही उत्तर भारत के आईटी नक्शे पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। धर्मशाला के चैतड़ू में राज्य का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क बनकर तैयार हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इसका नवंबर में उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन की सटीक तारीख जल्द तय की जाएगी। यह जानकारी मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (आईटी) गोकुल बुटेल ने मंगलवार को पार्क के निरीक्षण के बाद होटल धौलाधार धर्मशाला में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी।

सस्ती दरों पर युवाओं को मिलेगा इनक्यूबेशन स्पेस

गोकुल बुटेल ने बताया कि इस अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क में आईटी स्टार्टअप कंपनियों और युवाओं को सिर्फ 22 रुपए प्रति वर्ग फुट की दर पर रॉ इन्क्यूबेशन स्पेस दिया जाएगा, जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी सस्ता है।

सिर्फ 2820 रुपए के शुरुआती शुल्क पर एक सीट मिलेगी, जिसमें बिजली, पावर बैकअप और 12 घंटे की इंटरनेट बैंडविड्थ की सुविधा उपलब्ध होगी। पार्क में पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर प्लॉट दिए जाएंगे।

सुविधाओं से लैस अत्याधुनिक आईटी पार्क

यह पार्क गग्गल एयरपोर्ट के पास 18.29 करोड़ रुपए की लागत से 35602 वर्ग फुट क्षेत्र में बनाया गया है। इसमें शामिल हैं —

• 106 सीटों वाला प्लग एंड प्ले इन्क्यूबेशन स्पेस

• 4 प्रबंधकीय कैबिन

• 40 सीटों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम

• कांफ्रेंस रूम, मीटिंग हॉल, गेस्ट रूम, एसटीपीआई ऑफिस, नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर और रिसेप्शन यहां आईटी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, स्टार्टअप इनोवेशन और डिजिटल सेवाओं को नई दिशा मिलेगी।

400 युवाओं को मिलेगा रोजगार

इस पार्क के माध्यम से 15 से 20 नए उद्यमियों को तकनीकी सहायता और 350 से 400 युवाओं को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

बुटेल ने बताया कि शिमला के मेहली में दूसरा इन्क्यूबेशन सेंटर भी बन रहा है और इन दोनों केंद्रों से हिमाचल प्रदेश जल्द ही उत्तर भारत के नए आईटी हब के रूप में उभरेगा।

वीरभद्र सिंह सरकार में शुरू हुआ था निर्माण

गोकुल बुटेल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की नींव पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने रखी थी, लेकिन भाजपा सरकार के दौरान काम अधूरा रह गया।

उन्होंने कहा, “2022 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद हमारी प्राथमिकता रही कि इसे जल्द पूरा किया जाए ताकि हिमाचल के युवा दिल्ली, गुड़गांव और बेंगलुरु जाने की बजाय अपने राज्य में ही रोजगार पा सकें।”

उन्होंने बताया कि इस पार्क को सड़क से जोड़ने वाले मांझी पुल का निर्माण भी युद्धस्तर पर चल रहा है।

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