Himachal: सुबह से शाम तक सड़कों पर CM सुक्खू: जब एक मुख्यमंत्री ने दिखा दिया असली नेतृत्व क्या होता है

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मुख्यमंत्री होना सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे निभाना हर किसी के बस की बात नहीं। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को अपनी कार्यशैली से यह स्पष्ट कर दिया कि नेतृत्व केवल निर्णय लेने का नहीं, बल्कि ज़मीन पर उतरकर आमजन के साथ खड़े रहने का नाम है।

बुधवार की सुबह मुख्यमंत्री ने अपने दिन की शुरुआत सुबह 7 बजे नादौन विधानसभा क्षेत्र के सेरा विश्राम गृह से की, जहाँ उन्होंने आम नागरिकों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान वे पूरी तरह से मोर्चे पर डटे रहे और लोगों के दुख-दर्द को साझा करते हुए आपदा राहत कार्यों का जायजा लिया।

इसके बाद प्रातः 10 बजे, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, वे सड़क मार्ग से धर्मपुर के लिए रवाना हुए, जो आपदा से प्रभावित क्षेत्र था। दोपहर 12 बजे वहां पहुंचकर, मुख्यमंत्री ने तीन घंटे तक मौके पर रहकर प्रभावित लोगों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं जानीं और राहत कार्यों की समीक्षा की। उनका यह दौरा न सिर्फ प्रशासनिक दायित्व का निर्वहन था, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को दर्शाने वाला कदम भी था।

दोपहर बाद, जब मंडी जिले के ठूनाग क्षेत्र में राशन संकट की सूचना मिली, तो मुख्यमंत्री ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोपहर 3 बजे सरकाघाट के रैन गलू हैलीपैड से हेलीकॉप्टर के माध्यम से उड़ान भरी और मौके पर जाकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने जरूरतमंदों को राहत सामग्री बांटी और उनका मनोबल भी बढ़ाया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वे जनता के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े हैं।

सायं 5.30 बजे, मुख्यमंत्री ने रैन गलू से उड़ान भरकर 5.45 बजे शिमला के जुब्बड़हट्टी हवाई अड्डे पर लैंड किया और वहां से तुरंत सोलन जिले के वाकनाघाट पहुंचे। यहां उन्होंने एचआरटीसी की 24 वोल्वो बसों को हरी झंडी दिखाकर जनता को समर्पित किया। यह कार्यक्रम भी उन्होंने पूरी ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ संपन्न किया।

रात लगभग 8.30 बजे, मुख्यमंत्री वापस शिमला के लिए रवाना हुए और इस प्रकार उन्होंने दिनभर लगातार 13 घंटे से भी अधिक समय तक जनता के बीच रहकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। इस दिन की गतिविधियों ने यह सिद्ध कर दिया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू न केवल एक सक्षम प्रशासक हैं, बल्कि एक संवेदनशील जनसेवक भी हैं, जो हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़े रहते हैं।

इस प्रकार, बुधवार का यह व्यस्त और चुनौतीपूर्ण दिन यह संदेश देता है कि सुक्खू जैसा मुख्यमंत्री बनना हर किसी के बस की बात नहीं है—इसके लिए मेहनत, समर्पण और ज़मीनी जुड़ाव जरूरी है।

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