Himachal: शिमला सचिवालय के बाहर फूटा गुस्सा: 771 दिन से संघर्षरत दृष्टिबाधितों और पुलिस की तकरार, अब दी आत्मदाह की चेतावनी—10 दिसम्बर से उग्र आंदोलन!

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अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के मौके पर छोटा शिमला में माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। अपनी लंबित मांगों को लेकर वर्षों से संघर्ष कर रहे दृष्टिबाधित संघ ने सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उनकी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से तीखी बहस हुई, यहां तक कि डीएसपी और एसडीएम के साथ भी तकरार बढ़ गई। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। इसके चलते धक्का-मुक्की भी हुई।

दृष्टिबाधित संघ 771 दिनों से बैकलॉग भर्ती और पेंशन बढ़ोतरी की मांग को लेकर धरना दे रहा है। लगातार अनदेखी से नाराज संघ ने अब चेतावनी दे दी है कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर आत्मदाह करेंगे और 10 दिसंबर से आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।

यातायात रोकने की कोशिश पर बढ़ा तनाव

सचिवालय के सामने प्रदर्शनकारी जब सड़क पर उतरकर यातायात रोकने लगे तो पुलिस के साथ उनका विवाद और बढ़ गया। डीएसपी अमित ठाकुर और दृष्टिबाधितों के बीच जमकर बहसबाजी हुई। डीएसपी के एक बयान पर प्रदर्शनकारी और भड़क गए और माहौल और भी गरमा गया। इसी बीच एसडीएम शिमला शहरी ओशीन शर्मा भी मौके पर पहुंचीं, लेकिन वहां भी उनकी दृष्टिबाधितों से तीखी नोकझोंक हुई। विपरीत माहौल देखते हुए वे वहां से चली गईं।

सरकार के खिलाफ नारे, माहौल हुआ गरम

प्रदर्शनकारियों ने पेंशन और भर्ती में देरी को लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। एसडीएम ने इन नारों पर आपत्ति जताई, जिससे प्रदर्शनकारी और अधिक आक्रोशित हो गए। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कई बार बहस हुई।

आत्मदाह की चेतावनी, 10 दिसम्बर से उग्र आंदोलन

दृष्टिबाधित संघ के सचिव राजेश ठाकुर ने कहा कि उनकी मांगों पर सरकार कोई गंभीर कदम नहीं उठा रही। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उन्हें न्याय नहीं दिया तो वे मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर आत्मदाह करेंगे। संघ का कहना है कि बैकलॉग भर्ती, पेंशन बढ़ोतरी और अन्य मांगों को लेकर वे 771 दिनों से शिमला में प्रदर्शन कर रहे हैं। अब 10 दिसंबर से आंदोलन को और तेज किया जाएगा। बुधवार से उन्होंने क्रमिक अनशन शुरू किया है, जिसे आगे चलकर आमरण अनशन में बदला जा सकता है।

संघ का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कोई भी हथियार या दराट उनके पास नहीं थी, लेकिन अधिकारियों ने गलत आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दृष्टिबाधित लोग ऐसी कोई हरकत कर ही नहीं सकते, क्योंकि वे नजर पर निर्भर ही नहीं हैं।

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