धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य में पहली बार दुर्लभ और विलुप्तप्राय हिम तेंदुआ (स्नो लेपर्ड) कैमरा ट्रैप में कैद हुआ है। ‘घोस्ट ऑफ द माउंटेन्स’ के नाम से दुनिया भर में प्रसिद्ध इस दुर्लभ शिकारी का फोटोग्राफिक रिकॉर्ड मिलना प्रदेश की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।
उप वन संरक्षक रेजिनाल्ड रॉयस्टन ने बताया कि यह दुर्लभ तस्वीर 21 दिसंबर 2025 को समुद्र तल से 2,836 मीटर की ऊंचाई पर लगाए गए कैमरा ट्रैप में रिकॉर्ड हुई थी। यह धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य की जैव विविधता के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई है।
उन्होंने बताया कि यह सफलता अभयारण्य में अब तक किए गए सबसे व्यापक वन्यजीव कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण का परिणाम है। वर्ष 2023 से 2026 के बीच कुल 117 कैमरा ट्रैप लगाए गए, जिनके माध्यम से 4,238 कैमरा-ट्रैप दिवस का सर्वेक्षण किया गया। इसके अलावा वर्ष 2025 के शीतकाल के दौरान पर्वतीय धारों, दर्रों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन मार्गों पर वैज्ञानिक अध्ययन और स्थानीय पारिस्थितिक जानकारी के आधार पर अतिरिक्त कैमरे भी लगाए गए।
रेजिनाल्ड रॉयस्टन ने कहा कि हिम तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य का संरक्षण महत्व और बढ़ गया है। अब यह पश्चिमी हिमालय के उन चुनिंदा संरक्षित क्षेत्रों में शामिल हो गया है, जहां हिम तेंदुआ, हिमालयी भूरा भालू, एशियाई काला भालू और सामान्य तेंदुआ जैसी चार शीर्ष शिकारी प्रजातियां एक ही परिदृश्य में पाई जाती हैं। यह अभयारण्य की समृद्ध पारिस्थितिकी और संरक्षण क्षमता को दर्शाता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार कैमरे में कैद हुआ हिम तेंदुआ संभवतः अपने प्राकृतिक विस्तार क्षेत्र से भ्रमण या विस्थापन के दौरान यहां पहुंचा था। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य कुगती, टुंडाह और नरगू वन्यजीव अभयारण्यों के साथ लाहौल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक गलियारे के रूप में कार्य करता है। यह खोज पश्चिमी हिमालय में पर्वतीय वन्यजीवों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए आवासीय संपर्क बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित करती है।
उन्होंने कहा कि यह खोज धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीवों के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है और क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का मजबूत प्रमाण भी है। हिम तेंदुए का यह फोटोग्राफिक रिकॉर्ड धौलाधार पर्वतमाला की प्राकृतिक विरासत को नई पहचान देता है और हिमालयी वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि साबित होगा।
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