Shimla: शिमला नगर निगम अधिकारी की मौत मामले में बड़ा खुलासा! घर से मिला सुसाइड नोट, मानसिक तनाव का जिक्र

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राजधानी शिमला में नगर निगम के डिप्टी कंट्रोलर रामेश्वर शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। देर रात पुलिस द्वारा उनके आवास की दोबारा तलाशी लेने पर एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। इस नोट के मिलने के बाद पुलिस जांच की दिशा बदल गई है और अब मामले में कॉल डिटेल्स समेत अन्य पहलुओं की गहन जांच शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, सुसाइड नोट में रामेश्वर शर्मा ने अत्यधिक मानसिक तनाव और सर्विस प्रेशर का जिक्र किया है। हालांकि, उन्होंने किसी व्यक्ति, सहकर्मी या वरिष्ठ अधिकारी पर सीधे तौर पर प्रताड़ना का आरोप नहीं लगाया है। पुलिस ने नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है, ताकि हैंडराइटिंग और अन्य तकनीकी पहलुओं की पुष्टि की जा सके।

मृतक की पहचान 45 वर्षीय रामेश्वर शर्मा पुत्र तुलसी राम के रूप में हुई है। वह मूल रूप से रोहड़ू के सीमा गांव के निवासी थे और वर्तमान में शिमला के मैहली क्षेत्र में रह रहे थे। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को वह रोज की तरह कार्यालय गए थे, लेकिन दोपहर में अचानक घर लौट आए। बाद में उनकी पत्नी ने उन्हें घर में फंदे से लटका हुआ पाया। इसके बाद उन्हें तुरंत आईजीएमसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि फिलहाल मामले में बीएनएस की धारा 194 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब रामेश्वर शर्मा के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स खंगाल रही है, ताकि उनकी अंतिम बातचीत और हालात से जुड़े सुराग मिल सकें।

इस मामले में मृतक के रिश्तेदार कृष्ण शर्मा ने भी कई सवाल उठाए हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि रामेश्वर शर्मा बेहद शांत और नर्म स्वभाव के व्यक्ति थे और वह ऐसा कदम उठाने वाले इंसान नहीं थे। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में सर्विस डिप्रेशन और मानसिक दबाव का जिक्र यह संकेत देता है कि वह लंबे समय से तनाव में थे। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले में जो भी अधिकारी या कर्मचारी जिम्मेदार पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

रामेश्वर शर्मा की मौत के बाद एक साल पुराने विमल नेगी मामले की भी चर्चा फिर से तेज हो गई है। मार्च 2025 में हिमाचल पावर कॉर्पोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। उनका शव गोबिंद सागर झील से बरामद हुआ था और उस मामले में भी विभागीय प्रताड़ना और मानसिक तनाव के आरोप लगे थे। फिलहाल उस केस की जांच सीबीआई कर रही है।

इस नए मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक विभागों में काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, कार्यस्थल के दबाव और तनावपूर्ण माहौल को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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