शिमला में बीती रात हुई मूसलधार बारिश ने शहर के विभिन्न हिस्सों में तबाही मचा दी है। नगर निगम शिमला के अंतर्गत आने वाले कई वार्डों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे कई इमारतों को खतरा उत्पन्न हो गया है और वाहनों को भी नुक्सान पहुंचा है। सबसे गंभीर स्थिति संजौली वार्ड के बोथवेल क्षेत्र में देखी गई, जहां भूस्खलन के कारण एक मकान मलबे की चपेट में आ गया। इस मकान में रहने वाली एक मां और बेटी मलबे में फंस गईं। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पार्षद ममता चंदेल और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और सुबह 8 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

महापौर सुरेंद्र चौहान ने भी मौके का दौरा किया और कर्मचारियों को मलबा हटाने के निर्देश दिए। बोथवेल इलाके में भूस्खलन का मुख्य कारण ऊपर की ओर चल रहा भवन निर्माण कार्य बताया गया है, जिससे भूमि कमजोर हो गई थी। इसके अलावा शिमला के मैहली, विकासनगर, खलीनी, पंथाघाटी, भट्टाकुफर, चमियाना रोड, कृष्णा नगर, पटयोग, बीसीएस, रिल्दुभट्टा, भराड़ी सड़क और चक्कर क्रॉसिंग जैसे कई इलाकों में भी भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं।
मैहली इलाके में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में हुए भूस्खलन के कारण एक सैप्टिक टैंक फट गया, जिससे गंदा पानी और मलबा आसपास के घरों और रास्तों में फैल गया। प्रशासन ने यहां एहतियातन तिरपाल लगाकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इसी तरह चमियाना नाले में जल स्तर अत्यधिक बढ़ने से वहां स्थित 9 से 10 आवासीय इकाइयों पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह नाला लंबे समय से डंपिंग ज़ोन के समीप होने के कारण बारिश के समय दबाव में आ जाता है। नागरिकों ने नाले की तकनीकी जांच, जल निकासी की उचित व्यवस्था और स्थायी समाधान की मांग की है।
चमियाना न्यू ओपीडी रोड पर भी भूस्खलन के कारण सड़क बंद हो गई, जिससे मरीजों और आम लोगों को पैदल ही अस्पताल जाना पड़ा। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर सड़क को खोलने का प्रयास किया, लेकिन लगातार हल्का भूस्खलन जारी है। वहीं, भट्टाकुफर स्थित फल मंडी में भी सुबह के समय भूस्खलन हुआ, जिससे कुछ समय के लिए कारोबार ठप हो गया। इस मंडी में इन दिनों सेब, नाशपाती, आड़ू और प्लम जैसे फलों का व्यापार होता है। एपीएमसी चेयरमैन देवानंद वर्मा ने मंडी का दौरा कर आढ़तियों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
संजौली कॉलेज के पास बोथवेल क्षेत्र में हुए भूस्खलन का निरीक्षण शिमला शहरी विधायक हरीश जनारथा ने किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर मां-बेटी के रेस्क्यू की प्रक्रिया देखी और अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। विधायक ने जनता से अपील की कि बारिश के मौसम में नदी-नालों से दूर रहें और पूरी एहतियात बरतें।
महापौर सुरेंद्र चौहान ने नगर निगम के सभी वार्डों का दौरा किया और नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा नुकसान संजौली में हुआ है, जबकि अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी सड़कों की मरम्मत का कार्य जारी है। एमसी क्षेत्र में भूस्खलन से 3 वाहनों को नुकसान पहुंचा है और 5 पेड़ गिर गए हैं। भट्टाकुफर में मलबा गाड़ियों पर गिरने से दो वाहन क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि देवनगर में एक वाहन पर पत्थर गिरने से उसका शीशा टूट गया। भराड़ी में रगयान-दुधली सड़क पर पेड़ गिर जाने से यातायात बाधित रहा, जिसे बाद में प्रशासन ने हटाया।
धामी क्षेत्र में भी तेज बारिश से सड़कों और पगडंडियों की हालत खराब हो गई है। हलोग-गलोग सड़क पर ड्रेनेज व्यवस्था की कमी के कारण जगह-जगह गड्ढे पड़ गए हैं, जिनमें बारिश का पानी भर गया है। इससे सड़क से सटे मकानों को भी खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अवैध निर्माणों को बचाने के लिए सड़क की कटिंग केवल एक तरफ की गई है, जिससे वन्य संपदा को भी नुकसान हो रहा है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि अवैध डंपिंग बंद करवाई जाए और सड़क किनारे किए गए कब्जों को हटाया जाए।
इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। भूस्खलन और जलभराव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए स्थायी समाधान अब वक्त की ज़रूरत बन गई है।
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