शाहपुर में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन साध्वी भाग्यश्री भारती ने सुनाया भक्त प्रह्लाद का प्रसंग, अटूट भक्ति और मां के संस्कारों का बताया महत्व

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शाहपुर के अभिनंदन मैरिज पैलेस में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस साध्वी भाग्यश्री भारती जी ने भगवान श्रीकृष्ण और भक्त प्रह्लाद के प्रसंगों के माध्यम से भक्ति, विश्वास और संस्कारों का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान को पहचानने के लिए केवल बाहरी रूप या वेशभूषा को आधार नहीं बनाया जा सकता, बल्कि इसके लिए दिव्य दृष्टि और आध्यात्मिक समझ की आवश्यकता होती है।

साध्वी भाग्यश्री भारती जी ने शिशुपाल का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के सामने उपस्थित होने और उनकी लीलाओं की चर्चा सुनने के बावजूद शिशुपाल उन्हें पहचान नहीं पाया। उस समय के कई अन्य राजा भी भगवान श्रीकृष्ण की वास्तविकता को नहीं समझ सके। उन्होंने श्रद्धालुओं से सवाल किया कि यदि आज भगवान हमारे सामने आ जाएं तो क्या हम उन्हें पहचान पाएंगे? उन्होंने कहा कि भगवान को पहचानने का आधार उनकी बाहरी वेशभूषा नहीं हो सकती, क्योंकि बाहरी रूप कोई भी धारण कर सकता है।

उन्होंने कहा कि भगवान को पहचानने के लिए उस दिव्य दृष्टि की आवश्यकता है, जो भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध के मैदान में अर्जुन को प्रदान की थी। यदि मनुष्य अपने धार्मिक ग्रंथों का सही ढंग से अध्ययन और उनके संदेश को जीवन में आत्मसात करता है, तभी वह आध्यात्मिक सत्य को समझने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

भक्त प्रह्लाद का प्रसंग सुनाते हुए साध्वी जी ने कहा कि उनके जीवन में अनेक संकट आए, लेकिन वह कभी अपने भक्ति पथ से विचलित नहीं हुए। इसका कारण अपने श्रीहरि और नारायण के प्रति उनका पूर्ण विश्वास था। उन्होंने कहा कि यदि हम भी भक्त प्रह्लाद जैसा अटूट विश्वास चाहते हैं तो हमें भी उस परमात्मा को जानने की आवश्यकता है।

साध्वी भाग्यश्री भारती जी ने कहा कि भक्त प्रह्लाद के भीतर मौजूद अद्भुत भक्ति बल के पीछे कहीं न कहीं उनकी मां द्वारा दिए गए संस्कारों का भी महत्वपूर्ण योगदान था। उन्होंने कहा कि यह काफी हद तक मां पर निर्भर करता है कि वह अपनी संतान को किस सांचे में ढालना चाहती है। बच्चों को श्रेष्ठ संस्कार और अच्छे विचार देने का सबसे उपयुक्त समय उनकी बाल्यावस्था होती है। इसलिए माता-पिता को बच्चों को ऐसे संस्कार देने चाहिए, जिससे वे आगे चलकर श्रेष्ठ नागरिक बन सकें।

कथा के दौरान यजमान पूजन और ज्योति प्रज्वलन की रस्म भी निभाई गई। कथा के उपरांत जितेन्दर सोंधी, गोकुल सोंधी, उत्तम सिंह चंबियाल, बादल कौशिक और राहुल सोंधी ने ज्योति प्रज्वलित की। इसके बाद सभी भक्तों ने आरती की और प्रसाद ग्रहण किया।

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