जोगिंदरनगर, 4 मई: सरकार भले ही गरीबों के लिए कई योजनाओं का दावा करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। ऐसा ही एक दिल को झकझोर देने वाला मामला जोगिंदरनगर विधानसभा क्षेत्र की पंचायत बरेड़ के गांव मोहनघाटी से सामने आया है, जहां राजन नाम का एक व्यक्ति पिछले 5-6 महीनों से गंभीर बीमारी के कारण बिस्तर पर पड़ा है। बताया जा रहा है कि कूल्हे से नीचे का हिस्सा पूरी तरह काम करना बंद कर चुका है, जिससे वह चल-फिरने में असमर्थ हैं।
समाजसेवी के डी राणा मौके पर पहुंचे और उन्होंने बताया कि राजन पहले मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। लेकिन बीमारी ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। करीब 12 साल पहले उनकी पत्नी उन्हें और एक साल के मासूम बच्चों को छोड़कर चली गई थी। इसके बाद राजन ने अकेले ही अपने बच्चों की परवरिश की और पिता के साथ-साथ मां की भूमिका भी निभाई।
अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि परिवार के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। घर में कोई कमाने वाला नहीं है और कई बार बच्चों को भूखे पेट ही सोना पड़ता है। राजन के बेटे प्रिंस ने भावुक होकर बताया कि घर का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। जो थोड़ी-बहुत मदद मिलती भी है, वह पिता के इलाज में ही खर्च हो जाती है।
राजन दिन-रात अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं। उन्हें इस बात की फिक्र सता रही है कि उनके बच्चों को खाना कौन देगा और उनकी पढ़ाई कैसे चलेगी। हर दिन उनके लिए एक नई चुनौती बन चुका है।
समाजसेवी के डी राणा ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत का रवैया इस परिवार के प्रति संवेदनहीन है। राजन का घर बेहद जर्जर हालत में है और कभी भी गिर सकता है, लेकिन उन्हें अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना या किसी अन्य सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। अब जरूरत है कि प्रशासन और समाज दोनों आगे आएं और इस परिवार की मदद करें, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके और राजन को बेहतर इलाज मिल सके।
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