पालमपुर। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) में 750 अस्थायी चालकों की भर्ती के फैसले और कर्मचारियों के आंदोलन पर ESMA लगाए जाने को लेकर भारतीय जनता युवा मोर्चा ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा युवा मोर्चा हिमाचल प्रदेश के सह मीडिया प्रभारी अरविन्द सिंह चौधरी ने कहा कि कांग्रेस सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं और गलत नीतियों का बोझ कर्मचारियों और युवाओं पर डाल रही है।
अरविन्द सिंह चौधरी ने कहा कि HRTC इस समय गंभीर आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों से जूझ रहा है। कर्मचारियों को समय पर वेतन, पेंशन और अन्य देय लाभों को लेकर लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से अपनी जायज मांगों को सरकार के सामने उठा रहे हैं, लेकिन समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार टकराव का रास्ता अपना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 750 अस्थायी चालकों की भर्ती का फैसला कर्मचारियों के आंदोलन को कमजोर करने और उनकी आवाज को दबाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के हजारों युवा लंबे समय से नियमित रोजगार का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने सत्ता में आने से पहले रोजगार के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन अब नियमित भर्तियों के बजाय अस्थायी नियुक्तियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे युवाओं का भविष्य असुरक्षित होगा और सरकारी संस्थानों में स्थायित्व तथा जवाबदेही भी प्रभावित होगी।
अरविन्द सिंह चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में कर्मचारियों को अपनी मांगों और अधिकारों के लिए संघर्ष करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ESMA जैसे कठोर कानूनों का इस्तेमाल कर कर्मचारियों की आवाज दबाने का प्रयास सरकार की अधिनायकवादी सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में कर्मचारियों और जनता के हित में काम करना चाहती है तो उसे दमन की नीति छोड़कर संवाद और सहमति का रास्ता अपनाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता देख रही है कि कांग्रेस सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। महंगाई, बेरोजगारी, विकास कार्यों की धीमी गति और कर्मचारियों की अनदेखी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। HRTC कर्मचारियों के मुद्दे पर भी सरकार संवेदनशीलता दिखाने में पूरी तरह असफल रही है।
अरविन्द सिंह चौधरी ने कहा कि भारतीय जनता युवा मोर्चा कर्मचारियों, युवाओं और आम जनता के हितों से जुड़े हर मुद्दे पर उनके साथ खड़ा है। कर्मचारी विरोधी और युवा विरोधी फैसलों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि कर्मचारी संगठनों के साथ सार्थक वार्ता कर उनकी जायज मांगों को स्वीकार किया जाए तथा 750 अस्थायी चालकों की भर्ती के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।
उन्होंने कहा कि HRTC जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम को राजनीतिक प्रयोगशाला बनाने के बजाय उसके सुदृढ़ीकरण, कर्मचारियों के हितों की रक्षा और युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध करवाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। यही प्रदेश और जनता के हित में होगा।
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