पंजाब और चंडीगढ़ के विश्वविद्यालयों में हाल ही में सामने आई घटनाओं के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी विश्वविद्यालय परिसरों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की तैयारी की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देशों के तहत सोमवार को शिमला स्थित पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें प्रदेश के 17 निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि विश्वविद्यालयों में सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसके लिए प्रवेश और निकास द्वारों पर निगरानी बढ़ाने, आगंतुकों का सत्यापन करने, छात्रावासों की सुरक्षा मजबूत करने और निजी सुरक्षा कर्मियों का पुलिस सत्यापन व नियमित प्रशिक्षण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
बैठक की शुरुआत में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और चितकारा यूनिवर्सिटी में हाल ही में हुई घटनाओं पर प्रस्तुति दी गई। इन घटनाओं से सबक लेते हुए चर्चा की गई कि हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों में ऐसी परिस्थितियां पैदा न हों, इसके लिए पहले से प्रभावी इंतजाम किए जाएं। बैठक में आईजी सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, डीआईजी दक्षिणी रेंज, डीआईजी कानून एवं व्यवस्था, कमांडेंट प्रथम भारतीय आरक्षित वाहिनी और सोलन, शिमला, मंडी, बद्दी, कांगड़ा व ऊना के पुलिस अधीक्षक भी शामिल हुए।
पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने विश्वविद्यालयों से यातायात स्वयंसेवक योजना, साइबर सुरक्षा जागरूकता और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने मुख्यमंत्री के एंटी-चिट्टा जन आंदोलन में भी विश्वविद्यालयों से सक्रिय सहयोग मांगा। इसके अलावा, विश्वविद्यालयों और पुलिस के बीच नियमित समन्वय को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने की संभावना पर चर्चा की गई।
डीजीपी ने विश्वविद्यालयों से विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को पुलिस की सेवाओं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए उपलब्ध ट्रैक सुविधा के बारे में जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वविद्यालयों से पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यमों से जुड़ने की अपील भी की। बैठक में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप पुलिस का प्रयास केवल किसी घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे अप्रिय घटनाओं को पहले ही रोका जा सके। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की कि किसी भी आपात स्थिति, संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा संबंधी समस्या की जानकारी तुरंत हेल्पलाइन नंबर 112 पर दें।
प्रवक्ता और नोडल अधिकारी होंगे नामित
विश्वविद्यालयों में किसी घटना के बाद सोशल मीडिया पर अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए पुलिस के साइबर क्राइम और मीडिया प्रकोष्ठ के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके तहत हर विश्वविद्यालय एक अधिकृत प्रवक्ता नियुक्त करेगा, जो जरूरत पड़ने पर आधिकारिक जानकारी साझा करेगा। साथ ही, प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक नोडल सुरक्षा अधिकारी भी नामित किया जाएगा। यह अधिकारी संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक के लगातार संपर्क में रहेगा।
इसके अलावा, विश्वविद्यालय परिसरों का पुलिस के साथ संयुक्त सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। आपात स्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली भी तैयार की जाएगी, ताकि किसी भी घटना के समय समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।


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