हिमाचल प्रदेश के निजी स्कूलों में अब मनमानी किताबें नहीं चलेंगी। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इस संबंध में सख्त आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि सभी संबद्ध निजी स्कूलों को अब केवल बोर्ड द्वारा निर्धारित किताबों से ही पढ़ाई करवानी होगी। बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि स्कूल केवल अधिकृत डिपो या सेलर्स से ही पुस्तकें खरीद सकेंगे और विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर ही किताबें मंगानी होंगी।
बोर्ड ने नियमों को और सख्ती से लागू करते हुए किताबों की खरीद से जुड़े बिलों का सत्यापन अनिवार्य कर दिया है। सभी स्कूलों को अपने बिल अधिकृत डिपो से सत्यापित करवाकर 30 मई 2026 तक बोर्ड की संबद्धता शाखा में जमा करवाने होंगे। यदि कोई स्कूल निर्धारित समय सीमा तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं करता है, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
अभिभावकों और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने चेतावनी दी है कि जो स्कूल इन निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यहां तक कि नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि शिक्षा में एकरूपता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने दोहराया कि 30 मई तक बिलों का सत्यापन अनिवार्य है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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