Himachal: हिमाचल के गद्दी कुत्तों ने रचा इतिहास! ‘स्कूबी’ और ‘पुट्टी’ को मिली राष्ट्रीय पहचान

हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात है कि स्कूबी और पुट्टी नाम के दो हिमालयन गद्दी नस्ल के श्वानों को आधिकारिक तौर पर भारतीय राष्ट्रीय केनेल क्लब में पंजीकृत कर लिया गया है। यह उपलब्धि स्वदेशी हिमालयी गद्दी नस्ल के संरक्षण और पहचान की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे पहले राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBAGR) ने इस नस्ल को औपचारिक मान्यता दी थी, जिसके बाद इसे केनेल क्लब के प्रतिष्ठित रजिस्टर में शामिल करने का रास्ता साफ हुआ।

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हिमालयन गद्दी नस्ल हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र की पारंपरिक नस्ल है। इसका नाम गद्दी समुदाय के नाम पर रखा गया है, जो पीढ़ियों से भेड़ और बकरियों की सुरक्षा के लिए इन श्वानों का उपयोग करता आया है। यह नस्ल अपनी बहादुरी, सतर्कता और कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में काम करने की क्षमता के लिए जानी जाती है। मध्यम से बड़े आकार के ये श्वान मजबूत शरीर, घने रोएं और कठोर मौसम को सहन करने की क्षमता रखते हैं। इनका रंग आमतौर पर काला-भूरा, चितकबरा या पूरी तरह काला होता है।

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गद्दी श्वानों का मुख्य कार्य तेंदुए, भेड़िए और अन्य जंगली जानवरों से पशुधन की रक्षा करना रहा है। ये श्वान अपने मालिकों के साथ ऊंचाई वाले चरागाहों तक जाते हैं और लंबे समय तक कठिन इलाकों में काम करने में सक्षम होते हैं। इन्हें पारंपरिक रूप से पालतू जानवर के बजाय एक भरोसेमंद कार्यशील श्वान माना जाता है।

केनेल क्लब के अनुसार, गद्दी कुत्ता स्थानीय नाम है और इसे हिमालयन शीपडॉग की श्रेणी में रखा गया है। क्लब ने इस नस्ल को “हिमालयन गद्दी शीपडॉग” या “हिमालयन शीपडॉग गद्दी” के नाम से पंजीकृत करने की पेशकश की है। क्लब वर्ष 1957 से भारतीय स्वदेशी कुत्तों की नस्लों का पंजीकरण करता आ रहा है। इससे पहले मुधोल हाउंड, पाशमी, राजापलयम, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई और कंबाई जैसी नस्लें भी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुकी हैं।

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केनेल क्लब ने बताया कि पूर्व वर्षों में उत्तर भारत में आयोजित डॉग शो में हिमालयन गद्दी शीपडॉग का भी प्रदर्शन किया गया था। किसी भी स्वदेशी नस्ल को मान्यता देने से पहले उसके शारीरिक गुणों, स्वभाव, भौगोलिक उत्पत्ति और आनुवंशिक परीक्षण का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। जनवरी 2025 में इस नस्ल को आनुवंशिक मान्यता मिलने के बाद अब स्कूबी और पुट्टी के पंजीकरण ने हिमालयन गद्दी नस्ल को देश की आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त स्वदेशी नस्लों की सूची में मजबूत स्थान दिला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इस दुर्लभ हिमालयी नस्ल के संरक्षण और संवर्धन को नई गति मिलेगी।

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