शिमला। राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने लंबित मांगों का समाधान नहीं होने पर मानसून सत्र के दौरान विधानसभा के बाहर प्रदर्शन की चेतावनी दी है। यूनियन ने बोर्ड प्रबंधन को मांगों के समाधान के लिए 21 दिन का नोटिस दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि बार-बार ध्यान दिलाने के बावजूद प्रबंधन कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं कर रहा है, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है।

गुरुवार को बिजली बोर्ड मुख्यालय कुमार हाउस में हुई यूनियन की बैठक को संबोधित करते हुए महासचिव प्रशांत शर्मा ने कहा कि यदि 21 दिन की नोटिस अवधि में मांगों का समाधान नहीं किया गया तो यूनियन 26 अगस्त के बाद मानसून सत्र के दौरान विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी। उन्होंने बताया कि यूनियन की ओर से 5 अगस्त 2026 को बोर्ड प्रबंधन को इस संबंध में नोटिस जारी किया जा चुका है।
पुरानी पेंशन से लेकर नियमित भर्ती तक उठाई मांगें
यूनियन ने 15 मई 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की है। इसके अलावा मुख्यमंत्री की ओर से 18वें राज्य सम्मेलन में की गई घोषणाओं को लागू करने, पदोन्नति शक्तियों का दोबारा प्रत्यायोजन, आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नौकरी सुरक्षा नीति लागू करने और अनुबंध सेवा को अर्हक सेवा मानते हुए सभी लाभ देने की मांग उठाई गई है।
यूनियन ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित देयकों के भुगतान के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाने, स्मार्ट मीटर योजना की समीक्षा करने, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करने और प्रभावित कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ देने की भी मांग की है।

बिजली बोर्ड के अस्तित्व को लेकर भी चिंता
बैठक में यूनियन के पूर्व महासचिव एवं बिजली बोर्ड ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सह-संयोजक हीरा लाल वर्मा ने कहा कि बिजली संशोधन कानूनों के चलते पिछले कई वर्षों से पावर सेक्टर पर दबाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिजली संशोधन विधेयक-2025 के बाद राज्य बिजली बोर्डों के अस्तित्व पर भी खतरा पैदा हो गया है।
हीरा लाल वर्मा ने कर्मचारियों से संगठन को मजबूत करने और एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अब लड़ाई सिर्फ कर्मचारियों की मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली बोर्ड के भविष्य और अस्तित्व की भी है।
बैठक में राज्य उप महासचिव हेमराज भारद्वाज, वित्त सचिव हरीश भारद्वाज, संयुक्त सचिव रंगीन वर्मा, उपप्रधान वीरेंद्र ठाकुर और कार्यालय सचिव जयकृष्ण शर्मा सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। हेडक्वार्टर यूनिट के प्रधान अमित भरोटा और सचिव मुकेश नेगी ने केंद्रीय नेतृत्व को यूनियन के हर आंदोलन को सफल बनाने का भरोसा दिलाया।

कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित मांगें पूरी करने की मांग
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ हिमाचल प्रदेश के पूर्व प्रांत महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने भी 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेश सरकार से कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित वित्तीय मांगों को पूरा करने की मांग की है।
डॉ. पुंडीर ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से कर्मचारियों और पेंशनरों को 15 प्रतिशत महंगाई भत्ता, जनवरी 2022 से लंबित डीए एरियर और 2016 वेतन आयोग के एरियर का भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों की बोर्ड परीक्षा ड्यूटी का मेहनताना, प्रशिक्षणों का टीए-डीए और कर्मचारियों के मेडिकल बिल भी लंबे समय से लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि महंगाई के दौर में कर्मचारी आर्थिक दबाव झेल रहे हैं और कई लोगों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए ऋण लेने तक की नौबत आ रही है। डॉ. पुंडीर ने मुख्यमंत्री से स्वतंत्रता दिवस पर लंबित डीए, एरियर, मेडिकल बिलों और अन्य वित्तीय देयों के भुगतान की घोषणा करने की मांग की।

उन्होंने कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट वित्तीय रोडमैप और विशेष राहत पैकेज जारी करने का भी आग्रह किया। डॉ. पुंडीर ने कहा कि कर्मचारी और पेंशनर राज्य की विकास व्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए उनके वैधानिक अधिकारों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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