387 करोड़ के फर्जी डिग्री घोटाले में बड़ा मोड़, ऑस्ट्रेलिया में छिपे मां-बेटे भगौड़ा घोषित

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बहुचर्चित फर्जी डिग्री घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच के बाद आरोपियों को भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने से अब उन्हें स्वदेश लाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि इस मामले के मुख्य आरोपी अशोनी कंवर और मनदीप राणा, जो मां-बेटे हैं, फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि दोनों आरोपी जानबूझकर कानून से बच रहे थे, जिसे भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने से प्रमाणित किया गया है।

ईडी अधिकारियों के अनुसार, इस दर्जे के बाद अब विदेशी अदालतों में भारत का पक्ष और अधिक मजबूती से रखा जा सकेगा। इसके साथ ही आरोपियों पर आर्थिक और कानूनी दबाव बढ़ेगा और उनकी अंतरराष्ट्रीय गतिविधियां भी सीमित हो जाएंगी। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी राज कुमार राणा ने अपनी पत्नी अशोनी कंवर, बेटे मनदीप राणा और अन्य सह-आरोपियों की मदद से एजेंटों और छात्रों से पैसे लेकर मानव भारती विश्वविद्यालय, सोलन के नाम पर फर्जी डिग्रियां बेचीं।

ईडी की जांच के मुताबिक, फर्जी डिग्रियों की बिक्री से करीब 387 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई। इस रकम का इस्तेमाल आरोपियों ने देश के कई राज्यों में अपने नाम और संबंधित संस्थाओं के नाम पर चल-अचल संपत्तियां खरीदने में किया। अब तक इस मामले में करीब 200 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं।

ईडी यह जांच जिला सोलन के धर्मपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज आईपीसी 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत तीन एफआईआर के आधार पर कर रही है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद अशोनी कंवर और मनदीप राणा देश छोड़कर फरार हो गए थे और तब से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं। दोनों को कई बार जांच में शामिल होने के लिए तलब किया गया, लेकिन वे कभी पेश नहीं हुए।

इस मामले में एजेंटों की भूमिका भी ईडी की जांच के दायरे में है। मुख्य आरोपियों के साथ-साथ कुछ एजेंटों की संपत्तियां पहले ही अटैच की जा चुकी हैं। चूंकि यह घोटाला कई राज्यों तक फैला हुआ है, इसलिए जांच एजेंसी हर पहलू को गंभीरता से खंगाल रही है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने देश के 17 से अधिक राज्यों में फर्जी डिग्रियां बेचीं। इसके अलावा विदेशों में भी डिग्रियां बेचने के सबूत सामने आए हैं। एक-एक डिग्री के बदले लाखों रुपये वसूले गए और इस नेटवर्क के लिए एजेंटों का सहारा लिया गया। हजारों फर्जी डिग्रियां बेचकर 387 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की गई। अब एजेंसियां आरोपियों को भारत लाकर कानून के कटघरे में खड़ा करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही हैं।

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