Himachal: बिजली संशोधन विधेयक 2025 के खिलाफ देशभर में हड़ताल, हिमाचल में कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन, निजीकरण पर छिड़ी बड़ी लड़ाई

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केंद्र सरकार के प्रस्तावित विद्युत संशोधन विधेयक 2025 के खिलाफ देशभर सहित हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड कर्मचारियों, अभियंताओं और पैंशनरों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। वीरवार को कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ पैन डाउन और टूल डाउन हड़ताल करते हुए निजीकरण के प्रयासों के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस हड़ताल का असर बिजली बोर्ड के कार्यालयों के साथ-साथ फील्ड कार्यों में भी साफ दिखाई दिया। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया, जिससे आम जनता को जरूरी सेवाओं में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।

भोजनावकाश के दौरान प्रदेशभर में बिजली बोर्ड के कार्यालयों के बाहर कुल 63 स्थानों पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और निजीकरण के खिलाफ नारेबाजी की। कई जगहों पर प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भी सौंपे गए। इन प्रदर्शनों में बिजली बोर्ड कर्मचारियों, अभियंताओं, पैंशनरों के साथ-साथ विद्युत उपभोक्ताओं ने भी भाग लिया। शिमला में बिजली बोर्ड मुख्यालय के बाहर सैकड़ों कर्मचारियों और पैंशनरों ने एकजुट होकर विरोध जताया।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश के वित्त सचिव द्वारा बिजली बोर्ड के निजीकरण को लेकर दिए गए बयान की भी कड़ी आलोचना की। संयुक्त कार्रवाई समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्यों पर बिजली कंपनियों के निजीकरण का दबाव बना रही है और इसी दिशा में विद्युत संशोधन विधेयक 2025 लाया गया है। इस विधेयक को संसद के बजट सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में बिजली वितरण निजी हाथों में दिया गया है, वहां अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं और इससे उपभोक्ताओं और राज्य सरकारों दोनों को नुकसान उठाना पड़ा है।

कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित विधेयक के तहत एक ही क्षेत्र में कई वितरण कंपनियों को काम करने की अनुमति देने और सरकारी बिजली बोर्ड के नेटवर्क का उपयोग निजी कंपनियों को उपलब्ध कराने का प्रावधान है। साथ ही मध्यम और निम्न वर्ग के उपभोक्ताओं को दी जा रही क्रॉस सब्सिडी समाप्त करने का प्रस्ताव भी शामिल है। उन्होंने कहा कि दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी सरकारी कंपनियों पर ही छोड़ना राज्य सरकारों के अधिकारों को कमजोर करने जैसा है।

कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की स्मार्ट मीटरिंग योजना का भी विरोध किया और कहा कि इसका आर्थिक बोझ जनता पर डाला जा रहा है, जबकि इसका लाभ निजी कंपनियों को मिलेगा। संयुक्त कार्रवाई समिति ने मांग की कि बिजली बोर्ड का निजीकरण करने के बजाय उसे मजबूत किया जाए, कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए नई भर्ती की जाए और पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व इंजीनियर लोकेश ठाकुर, हीरा लाल वर्मा, मुकेश राठी, प्रशांत शर्मा, मनोहर लाल, एसके सोनी और केएस गुप्ता सहित कई कर्मचारी नेताओं ने किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह लड़ाई केवल कर्मचारियों की नहीं, बल्कि अभियंताओं, आउटसोर्स कर्मचारियों, पैंशनरों और उपभोक्ताओं सभी की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए गए तो प्रदेश की जनता के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

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