500 करोड़ के क्रिप्टो स्कैम में बड़ा खुलासा! 2.5 लाख निवेशकों का पैसा बेनामी संपत्तियों में लगाया गया, ED की जांच तेज

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500 करोड़ रुपये से अधिक के चर्चित क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। जांच में सामने आया है कि हिमाचल प्रदेश और पंजाब के 2.5 लाख से अधिक निवेशकों से कथित तौर पर जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कई बेनामी संपत्तियां खड़ी करने में किया गया। अब जांच एजेंसी का फोकस रियल एस्टेट निवेश और उन संपत्तियों की पहचान पर है, जिन्हें कथित तौर पर इस धन से खरीदा गया।

जांच के अनुसार यह मामला केवल ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी तक सीमित नहीं था। आरोप है कि कथित रूप से फर्जी ‘कोर्वियो कॉइन (KRO)’ के नाम पर निवेशकों से धन एकत्र किया गया और बाद में उसी पैसे से जमीन और अन्य अचल संपत्तियों में निवेश किया गया। मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे सुभाष शर्मा के दुबई फरार होने की बात सामने आई है, जबकि जांच एजेंसियां उसके सहयोगियों और कथित वित्तीय नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि मासूम और विजय जुनेजा कथित नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्से थे। जांच एजेंसी के अनुसार सुभाष शर्मा और उसके सहयोगियों हेमराज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक और राधिका द्वारा निवेशकों से प्राप्त धन का एक हिस्सा नकद रूप में इन तक पहुंचाया जाता था। आरोप है कि इसी नकदी का इस्तेमाल महंगी संपत्तियां खरीदने में किया गया, जहां दस्तावेजों में कम कीमत दिखाई जाती थी और वास्तविक भुगतान का बड़ा हिस्सा नकद में किया जाता था।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित घोटाले की कितनी राशि रियल एस्टेट क्षेत्र में लगाई गई। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कुछ संपत्तियों को जब्त भी किया जा सकता है। इस मामले में कई अन्य लोग भी ईडी की जांच के दायरे में हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं तथा मुख्य आरोपी को भारत लाने के प्रयास भी तेज किए जा रहे हैं।

जांच में यह भी दावा किया गया है कि एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए आरोपियों ने अपने कर्मचारियों के नाम पर कई बैंक खाते खुलवाए। हालांकि इन खातों का वास्तविक नियंत्रण कथित तौर पर आरोपियों के पास ही था और निवेशकों से प्राप्त धन इन्हीं खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता था।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2018 में शुरू हुई इस कथित एमएलएम पोंजी योजना को सुनियोजित तरीके से संचालित किया गया। जांच के अनुसार भारतीय सर्वर की बजाय विदेशी सर्वर का इस्तेमाल किया गया और ‘Corvio.io’ तथा ‘Voskro.com’ जैसे डोमेन के माध्यम से लोगों को अधिक मुनाफे और ऊंचे रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए आकर्षित किया गया।

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