Mandi: क्या मंडी में कांग्रेस की वापसी तय? CM सुक्खू का 36 करोड़ का “राहत मास्टर-स्ट्रोक” बदल सकता है पूरा सियासी खेल!

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मंडी में हालिया आपदा के बाद राहत कार्यों के जरिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने न सिर्फ लोगों की मदद की है, बल्कि कांग्रेस के लिए राजनीतिक जमीन भी तैयार कर दी है। आपदा प्रभावितों के लिए 36 करोड़ रुपये आवंटित करके सुक्खू ने ऐसी राहत पहुंचाई है, जो आने वाले चुनावों में मंडी जिले में कांग्रेस को फिर से मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

मंडी—कांग्रेस का लगातार सिकुड़ता जनाधार

पिछले दो विधानसभा चुनावों और 2014 के बाद हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का जनाधार मंडी में तेजी से गिरता गया। आज हालत यह है कि 10 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी सिर्फ धर्मपुर तक सीमित होकर रह गई है।

2021 के उपचुनाव में प्रतिभा सिंह की जीत ने थोड़ी राहत जरूर दी, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस यहां सिर्फ एक सीट ही जीत पाई।

अब सुक्खू सरकार अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे कर चुकी है, और अगला विधानसभा चुनाव करीब है। ऐसे में मंडी में कांग्रेस की खोई जमीन वापस पाना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है। सीएम सुक्खू का राहत पैकेज इस चुनौती के बीच कांग्रेस के लिए अहम राजनैतिक पूंजी साबित हो सकता है।

क्या सुक्खू का मास्टर-स्ट्रोक मंडी में समीकरण बदल देगा?

आपदा राहत देने के दौरान सुक्खू ने मानवीय आधार पर मदद की, लेकिन राजनीतिक तौर पर यह कदम कांग्रेस के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।

अब बड़ा सवाल यह है —

क्या यह राहत राजनीति मंडी को भाजपा के किले से बाहर निकाल पाएगी?

क्योंकि यह वही मंडी है जहां जयराम ठाकुर का प्रभाव मजबूत माना जाता है और जहां कांग्रेस वर्षों से कमजोर होती चली गई है।

संगठन कमजोर, सरकार को खुद मैदान में उतरना पड़ा

हिमाचल में कांग्रेस संगठन पिछले एक साल से लगभग निष्क्रिय है।

प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह जरूर मौजूद हैं, लेकिन संगठनात्मक गतिविधियों का हाल बेहद कमजोर है।

ऐसे माहौल में खुद सीएम सुक्खू का मंडी के मैदान में उतरना इस बात का संकेत है कि पार्टी अब यहां से भविष्य की रणनीति तैयार कर रही है।

आपदा ने मंडी को गहरे जख्म दिए थे—और अब राहत देकर सुक्खू ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सरकार लोगों के साथ खड़ी है।

राजनीतिक रूप से इसे कांग्रेस के पुराने जनाधार को वापस पाने की दिशा में बड़ा वार माना जा रहा है।

यह स्थिति तब और दिलचस्प हो जाती है जब कांग्रेस के वरिष्ठ चेहरे—कौल सिंह ठाकुर, सोहन लाल ठाकुर, रंगीला राम राव, प्रकाश चौधरी—लगातार हार से निराश हैं, और नाचन, जोगिंद्रनगर, सराज और करसोग जैसे क्षेत्रों में पार्टी कमजोर दिख रही है।

अब देखना यह है कि क्या सुक्खू का यह कदम कांग्रेस को मंडी में फिर से मुकाबले में खड़ा कर पाएगा या नहीं।

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