Himachal: चंबा मेडिकल कॉलेज में हिंसा: कब तक डाक्टर अपमान और हमले सहते रहेंगे? : शीतल एमएल कश्यप

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पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, चंबा में बीती रात एक बेहद चिंताजनक घटना सामने आई जब कॉलेज के छात्रों और स्थानीय लोगों के बीच झगड़ा हिंसा में बदल गया। इस हमले में चार मेडिकल छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। चश्मदीदों के अनुसार, स्थानीय लोगों के पास लोहे की रॉड और चाकू जैसे घातक हथियार थे। हमला इस कदर बेरहमी से किया गया कि एक छात्र की गर्दन में कैरोटिड धमनी के बेहद करीब चोट लगी, जो जानलेवा साबित हो सकती थी। एक अन्य छात्र के हाथ में चाकू मारा गया जबकि बाकी दो छात्र भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

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इस घटना के बाद मेडिकल बिरादरी में भारी आक्रोश है। कॉलेज की छात्रा शीतल एम.एल. कश्यप ने इस घटना को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि मेडिकल प्रोफेशन में सबसे पहले सहानुभूति सिखाई जाती है, और वह भी इसी उद्देश्य से इस क्षेत्र में आई थीं – लोगों की सेवा करने के लिए। लेकिन आज के बदलते हालात देखकर उन्हें यह विश्वास नहीं रहा कि वह एक ऐसी डॉक्टर बन पाएंगी जो नि:स्वार्थ भाव से सेवा कर सके।

शीतल ने सवाल उठाया है कि आखिर इस तरह की घटनाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा? वे कहती हैं कि क्या दोष उन हमलावरों का है जिन्होंने यह हिंसक कृत्य किया, या फिर सरकार का जो डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए अब तक कोई सख्त कानून नहीं बना सकी है? उनका मानना है कि हमलावरों को पता है कि उन्हें हर बार सजा से बचने का रास्ता मिल जाएगा, और यही कारण है कि ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाती हैं।

डॉक्टरों की भूमिका को लेकर समाज की अपेक्षाएं भी सवालों के घेरे में हैं। शीतल का कहना है कि डॉक्टर अपनी पूरी जवानी, निजी जिंदगी और स्वास्थ्य दांव पर लगाकर लोगों की जान बचाते हैं, लेकिन बदले में उन्हें अपमान, हिंसा और डर का सामना करना पड़ता है। वे चेतावनी देती हैं कि अगर हालात नहीं बदले, तो कोई भी भारत में डॉक्टर बनकर सेवा करना नहीं चाहेगा।

उनका स्पष्ट संदेश है कि अब समय आ गया है जब सरकार को डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए ठोस और सख्त कानून बनाने होंगे। यह विषय केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इस पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। शीतल की यह पीड़ा आज उनके दिल से निकली आवाज है, लेकिन अगर हालात ऐसे ही रहे, तो कल यही आवाज लाखों डॉक्टरों की चीख बन सकती है।

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