शिमला: हिमाचल प्रदेश में जमीन से जुड़े छोटे-बड़े कामों के लिए अब लोगों को पटवारी, तहसील और राजस्व कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिलने लगी है। पुश्तैनी जमीन का रिकॉर्ड हो या इंतकाल, निशानदेही और तकसीम जैसे मामले, राजस्व विभाग इन सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करवाकर लोगों की मुश्किलें कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब मोबाइल फोन से ही डिजिटल हस्ताक्षरित जमाबंदी प्राप्त करने के साथ राजस्व अदालतों में ऑनलाइन केस दर्ज करवाने और मामलों की सुनवाई की सुविधा भी उपलब्ध हो रही है।
प्रदेश सरकार के डिजिटल राजस्व प्रशासन को बढ़ावा देने के प्रयासों से लंबित मामलों के निपटारे और भूमि अभिलेखों को अपडेट करने में भी तेजी आई है। बीते चार वर्षों में सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आया है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश की सभी 479 राजस्व अदालतें ऑनलाइन प्रणाली से जुड़ चुकी हैं और लंबित जमाबंदियों में करीब 90 फीसदी तक कमी दर्ज की गई है।

राजस्व प्रशासन को आधुनिक और नागरिक केंद्रित बनाने के लिए विभाग ने ई-हिमभूमि, राजस्व प्रबंधन प्रणाली यानी आरएमएस, आरसीसीएमएस, भू-नक्शा पोर्टल और माई डीड पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इनके जरिए भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण के साथ राजस्व सेवाओं को सरल, पारदर्शी और आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
479 राजस्व अदालतें ऑनलाइन, 71 हजार मामले डिजिटल दर्ज
राजस्व न्यायालयों के आधुनिकीकरण की दिशा में राजस्व प्रबंधन प्रणाली यानी आरएमएस एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बनकर सामने आई है। 1 सितंबर 2025 से इस पोर्टल को पूरी तरह ऑनलाइन और पेपरलेस व्यवस्था के रूप में संचालित किया जा रहा है। इसके बाद 9 सितंबर 2025 को अधिसूचना जारी कर हिमाचल प्रदेश रेवेन्यू कोर्ट्स ऑनलाइन फाइलिंग एंड प्रोसीजर रूल्स-2025 लागू किए गए। इससे ऑनलाइन राजस्व न्यायालय व्यवस्था को कानूनी आधार भी मिला है।
इस प्रणाली के जरिए अब तक 2,12,918 राजस्व मामलों को प्रोसेस किया जा चुका है। इनमें 71 हजार मामले पूरी तरह ऑनलाइन और पेपरलेस रेवेन्यू कोर्ट मॉड्यूल के माध्यम से दर्ज किए गए हैं। प्रदेश की सभी 479 राजस्व अदालतें इस व्यवस्था से जुड़ चुकी हैं। प्लेटफॉर्म पर करीब 28 हजार कॉज लिस्ट तैयार की गई हैं, जबकि लगभग 16 हजार अधिवक्ता और 52 हजार से अधिक नागरिक पंजीकृत हो चुके हैं।
लोक अदालतों के जरिए लंबित मामलों के निपटारे पर जोर
राजस्व मामलों के जल्द निपटारे के लिए हर महीने के अंतिम दिनों में मासिक लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है। इनमें तकसीम, निशानदेही, राजस्व प्रविष्टियों में दुरुस्ती और अतिक्रमण से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका उद्देश्य वर्षों से लंबित मामलों का बोझ कम करना और लोगों को अनावश्यक इंतजार से राहत दिलाना है।

6,500 से घटकर 750 रह गई लंबित जमाबंदियां
भूमि अभिलेखों को अपडेट रखने के लिए राजस्व विभाग ने विशेष अभियान चलाया। इसके तहत अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार लंबित जमाबंदियों का काम पूरा करने के निर्देश दिए गए। अभियान के बाद लंबित जमाबंदियों की संख्या करीब 6,500 से घटकर लगभग 750 रह गई है। यानी लंबित कार्य में करीब 90 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।
करीब 5,750 जमाबंदियों को अपडेट किया गया है। इनमें वर्तमान स्थिति के साथ पिछले पांच वर्षों के दौरान जमीन से संबंधित हुए लेनदेन को भी दर्ज किया गया है।
मोबाइल पर मिलेगी डिजिटल हस्ताक्षरित जमाबंदी
ई-हिमभूमि पोर्टल के जरिए अब नागरिक डिजिटल हस्ताक्षरित जमाबंदी भी प्राप्त कर सकते हैं। इससे प्रमाणित भूमि अभिलेख हासिल करने के लिए लोगों को बार-बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। खासकर रोजगार और शिक्षा के सिलसिले में गांव से बाहर रहने वाले लोगों के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी साबित हो रही है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार राजस्व प्रशासन को डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इन पहलों से जहां राजस्व सेवाओं की पहुंच आम नागरिक तक आसान हो रही है, वहीं भूमि अभिलेखों के रखरखाव और राजस्व मामलों के निपटारे में भी तकनीक की भूमिका मजबूत हुई है।


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