शाहपुर। कांगड़ा जिले के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के मनेई (भद्रेला) में प्रकृति, अध्यात्म और स्वास्थ्य को जोड़ने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हुई है। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने शनिवार को यहां ‘परमार्थ इको विलेज’ का भूमि पूजन किया। वृंदा फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से विकसित किए जा रहे इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और मानवीय सेवा के साथ प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली को बढ़ावा देना है। इस मौके पर राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण के लिए एक लाख पौधे लगाने के संकल्प की शुरुआत पौधारोपण करके की।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि यहां केवल एक परियोजना की आधारशिला नहीं रखी जा रही, बल्कि प्रकृति और मानवता के बीच संतुलन कायम करने वाले विचार की नींव रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘परमार्थ इको विलेज’ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली अपनाने का प्रेरणादायक केंद्र बनेगा।
राज्यपाल ने भारतीय संस्कृति में प्रकृति के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी परंपरा में पृथ्वी को माता, नदियों को जीवनदायिनी, पर्वतों को देवस्वरूप और वृक्षों को जीवन का आधार माना गया है। उन्होंने कहा कि इंसान प्रकृति का मालिक नहीं, बल्कि उसका संरक्षक है। इसलिए सभी की जिम्मेदारी है कि धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और समृद्ध रूप में सौंपा जाए।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती है। इसका समाधान केवल सरकारी नीतियों और योजनाओं से नहीं हो सकता, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जीवनशैली, सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना होगा। राज्यपाल ने कहा कि ‘परमार्थ इको विलेज’ जैसी पहल पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

राज्यपाल ने सुझाव दिया कि इस परियोजना को एक जीवंत शिक्षण और प्रेरणा केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, जहां विद्यार्थी, किसान, शोधकर्ता, युवा उद्यमी, स्वयं सहायता समूह और समाज के विभिन्न वर्ग प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली को समझने के साथ उसे अपने व्यवहार में भी अपना सकें।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही ‘एक पेड़ मां के नाम’, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, अमृत सरोवर अभियान और मिशन लाइफ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है।
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य में पर्यावरण संरक्षण का विशेष महत्व है। राज्य की नदियां, वन, हिमालयी पारिस्थितिकी, जैव विविधता और प्राकृतिक जल स्रोत अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण के साथ पर्यटन, कृषि, बागवानी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को इस तरह बढ़ावा देने की जरूरत है, जिससे प्रकृति पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘परमार्थ इको विलेज’ में जैविक खेती, स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक जीवनशैली और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे क्षेत्र के किसानों, महिलाओं, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए आजीविका के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
राज्यपाल ने परम पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन आध्यात्मिक साधना, मानव सेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन के माध्यम से स्वामी चिदानंद सरस्वती ने आध्यात्मिक चेतना को सामाजिक उत्तरदायित्व और प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। राज्यपाल ने विश्वास जताया कि स्वामी जी का मार्गदर्शन और आशीर्वाद ‘परमार्थ इको विलेज’ को विशिष्ट पहचान देगा और यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण तथा मानवीय सेवा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगी।
राज्यपाल ने इस परियोजना की परिकल्पना और इसे साकार करने के प्रयासों के लिए वृंदा फाउंडेशन ट्रस्ट की सराहना की। उन्होंने ट्रस्ट की संरक्षक डॉ. मेघना चौधरी की दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता की भी सराहना करते हुए उन्हें इस पहल के लिए बधाई दी।
इस अवसर पर राज्यपाल ने इको विलेज के निर्माण के लिए भूमि दान करने वाले राकेश और दिनेश को सम्मानित किया और उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय चित्रकार संजय धीमान और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहीं स्थानीय पर्यावरण संरक्षक रूमी देवी को भी सम्मानित किया गया।
परमार्थ इको विलेज के प्रोजेक्ट को लेकर वृंदा फाउंडेशन ट्रस्ट के ट्रस्टी न्यायमूर्ति उमेश कुमार सिरोही ने बताया कि पहले चरण के लिए 50 कनाल भूमि अर्जित कर ली गई है। इस चरण में करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पूरे प्रोजेक्ट के लिए 200 कनाल भूमि प्रस्तावित है और इसे वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मनई के समीप स्थित इस खूबसूरत वैली में आध्यात्मिक ऊर्जा केंद्र के साथ आयुर्वेदिक और एलोपैथिक चिकित्सा सुविधाएं, खेलकूद, मेडिटेशन सेंटर और अन्य जनकल्याणकारी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। ट्रस्ट का उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य, योग, आध्यात्मिकता और प्रकृति से जोड़ना है। राज्यपाल ने कहा कि स्वामी चिदानंद जी के आशीर्वाद से आने वाले समय में यह स्थान एक तीर्थस्थल के रूप में भी जाना जाएगा।
कार्यक्रम में वृंदा फाउंडेशन के ट्रस्टी न्यायमूर्ति उमेश कुमार सिरोही, विकास शर्मा और डॉ. मेघना चौधरी ने राज्यपाल कविंद्र गुप्ता को पारंपरिक पहाड़ी टोपी, शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर स्वामी दिव्यानंद पुरी महाराज, पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश के.के. शर्मा, पूर्व जिला न्यायाधीश अनिल, डॉ. मेघना चौधरी, फाउंडेशन के सदस्य राहुल शर्मा, संजीव सिंह, प्रमोद कुमार, आशीष कुमार और गौरांश सिरोही सहित डॉ. नीलू शर्मा, डॉ. गौतम पठानिया और प्रोफेसर अनुपम समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।


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