पांवटा साहिब के मटक माजरी स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला की स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। वर्ष 2009 में 30 विद्यार्थियों के साथ शुरू हुआ यह स्कूल 17 साल बाद भी अपने भवन के लिए जमीन का इंतजार कर रहा है। मौजूदा समय में पहली से पांचवीं तक की पांचों कक्षाएं पंचायत के सामुदायिक भवन के एक ही कमरे में चल रही हैं और छात्रों की संख्या घटकर महज 11 रह गई है।

माजरा शिक्षा खंड के तहत आने वाली राजकीय प्राथमिक पाठशाला मटक माजरी लंबे समय से सियासत, प्रशासन और शिक्षा विभाग की बेरुखी का सामना कर रही है। वर्ष 2009 में शुरू हुआ यह विद्यालय करीब 17 साल बीत जाने के बाद भी पंचायत के सामुदायिक भवन के एकमात्र कमरे में संचालित हो रहा है। इस दौरान सरकारें और अधिकारी बदलते रहे, लेकिन स्कूल के लिए स्थायी भवन की व्यवस्था नहीं हो सकी।
स्कूल भवन के लिए जमीन उपलब्ध करवाने की योजनाएं वर्षों से कागजों तक सीमित रहने का आरोप है। मेरा गांव मेरा देश संस्था के संचालक अनुराग गुप्ता और अध्यक्ष पुष्पा खंडूजा ने बताया कि प्राथमिक पाठशाला मटक माजरी की स्थिति बेहद दयनीय है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में शुरू हुए इस स्कूल में विद्यार्थी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
एक ही कमरे में चल रही पांचों कक्षाएं
पंचायत के सामुदायिक भवन के इकलौते कमरे में पहली से पांचवीं तक की पांचों कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इसी कमरे में स्कूल का स्टोर रूम भी है, जबकि शिक्षकों का स्टाफ रूम और कार्यालय भी यहीं चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्कूल को अपना भवन मिल जाए तो विद्यार्थियों की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से अब तक इस दिशा में ठोस समाधान नहीं हो पाया है।
वर्ष 2009 में जब स्कूल शुरू हुआ था, तब यहां 30 विद्यार्थी पढ़ते थे। सुविधाओं की कमी और बदहाल स्थिति के बीच अब छात्रों की संख्या घटकर केवल 11 रह गई है।
शौचालय की सुविधा भी नहीं, ग्रामीणों ने बनाई कामचलाऊ व्यवस्था
स्कूल में बेहतर शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों के सहयोग से गड्ढे और पाइप की कामचलाऊ व्यवस्था की गई है। वर्तमान में विद्यालय में दो अध्यापक और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं।
17 वर्षों से सामुदायिक भवन के एक कमरे में चल रहे इस स्कूल के लिए अब तक जमीन का प्रावधान नहीं हो पाया है। स्कूल प्रभारी शिप्रा सैनी ने बताया कि इस पूरी स्थिति से शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत करवाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में छात्रों की संख्या घटकर 11 रह गई है और स्कूल भवन के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
वहीं, माजरा के बीईईओ रामपाल ने बताया कि पूर्व में भी स्कूल भवन के लिए भूमि उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाते रहे हैं। हालांकि, अभी तक मटक माजरी स्कूल भवन के लिए उपयुक्त भूमि का बंदोबस्त नहीं हो सका है।


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