कृषि में फसल विविधीकरण का महत्व लगातार बढ़ रहा है। एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग फसलों की खेती अपनाकर किसान अपनी कृषि व्यवस्था को अधिक मजबूत और लाभकारी बना सकते हैं। आवारा पशुओं और अन्य जंगली जानवरों से पारंपरिक फसलों को होने वाले नुकसान के बीच किसान अब ऐसी फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं, जिनमें नुकसान का जोखिम अपेक्षाकृत कम हो और बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बनी रहे। कांगड़ा जिले के बैजनाथ उपमंडल के सुनपुर गांव में हल्दी की खेती इसी बदलाव की सकारात्मक मिसाल बनकर सामने आ रही है।

हिमाचल प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय को सुरक्षित करने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती से उत्पादित विभिन्न फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध करवा रही है। इनमें गेहूं, मक्का, जौ और हल्दी शामिल हैं। प्राकृतिक रूप से उत्पादित कच्ची हल्दी का समर्थन मूल्य 150 रुपये प्रति किलोग्राम किए जाने से किसानों का रुझान इस फसल की ओर बढ़ा है। सरकारी स्तर पर हल्दी के समर्थन मूल्य को 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलो किया गया है।
खाद्य पदार्थों, मसालों और विभिन्न प्रसंस्कृत उत्पादों में व्यापक उपयोग के कारण हल्दी की बाजार में मांग बनी रहती है। ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इसकी खेती किसानों के लिए आय का अतिरिक्त स्रोत विकसित करने का अवसर प्रदान कर सकती है। हल्दी की खेती को प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण के साथ जोड़कर किसान अपनी कृषि आय के नए विकल्प तलाश सकते हैं।
बैजनाथ के सुनपुर गांव की किसान प्रवीण कुमारी और सुजाता देवी हल्दी की खेती को बेहतर विकल्प के रूप में देख रही हैं। उनका मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में हल्दी की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बन सकती है। सरकार की ओर से हल्दी के लिए बेहतर समर्थन मूल्य दिए जाने से भी किसानों को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
सुनपुर गांव की किसान प्रवीण कुमारी बताती हैं कि उनके खेतों में धान, मक्की सहित विभिन्न फसलों की खेती की जाती है। इस बार उन्होंने पारंपरिक फसलों के साथ हल्दी की खेती भी की है। उनके अनुसार, हल्दी की फसल को तैयार होने में लगभग एक वर्ष का समय लगता है और बाजार में इसकी अच्छी मांग है। हल्दी की खेती अपनाकर किसान अपनी फसल विविधता बढ़ा सकते हैं और आमदनी के नए अवसर तलाश सकते हैं।
प्रवीण कुमारी के अनुसार, हल्दी की खेती के प्रति किसानों की रुचि बढ़ने का एक प्रमुख कारण हिमाचल सरकार की ओर से इसके समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि भी है। पहले हल्दी की कीमत लगभग 90 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि अब इसका समर्थन मूल्य करीब 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इससे किसानों को बेहतर आमदनी की उम्मीद जगी है।
सुनपुर गांव की किसान सुजाता देवी भी हल्दी की खेती को किसानों के लिए लाभकारी विकल्प मानती हैं। उनका कहना है कि हल्दी जैसी वैकल्पिक फसल की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। सरकार की ओर से हल्दी को प्रोत्साहन मिलने और इसके लिए 150 रुपये प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य निर्धारित होने से किसानों को बेहतर आय की संभावना दिखाई दे रही है।


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