भारत की रक्षा, विदेश और आर्थिक नीतियों ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। आज देश कई बड़े राष्ट्रों को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ रहा है। हिमाचल प्रदेश को जल संपदा, वन संपदा, औषधीय पौधों और प्राकृतिक सौंदर्य का अनमोल वरदान मिला है। इन संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर पर्यटन, बागवानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सकती है। यह बात राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने चंबा के ऐतिहासिक चौगान में ‘आत्मनिर्भर भारत-थर्ड डेस्टिनेशन हिमाचल एक्सपो 2026’ की मेगा प्रदर्शनी के दूसरे दिन आयोजित कार्यक्रम में कही।
राज्यपाल ने कहा कि पर्यटन को केवल कुछ प्रसिद्ध हिल स्टेशनों तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण, सांस्कृतिक, धार्मिक और साहसिक पर्यटन के साथ होमस्टे जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा देना चाहिए। अपने लद्दाख कार्यकाल का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वहां होमस्टे और बाइकर्स टूरिज्म ने स्थानीय लोगों की आजीविका में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद की थी। उन्होंने विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र बेहद संवेदनशील हैं। ऐसे में पिछले वर्षों में आई आपदाओं से सबक लेते हुए सतत और पर्यावरण-अनुकूल विकास मॉडल अपनाना जरूरी है।
राज्यपाल ने कहा कि यह एक्सपो केवल एक मेला नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक उपलब्धियों और तकनीकी प्रगति को आम लोगों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने स्टॉल धारकों और अधिकारियों से स्थानीय युवाओं तथा कारीगरों के साथ लगातार संवाद स्थापित करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्हें आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और कौशल विकास का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक्सपो में आने वाले युवा नए विचार, नए कौशल और नए संकल्प लेकर लौटेंगे। युवा केवल रोजगार पाने वाले न बनें, बल्कि रोजगार देने वाले बनकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दें।
राज्यपाल ने कहा कि चंबा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरती पर इस महत्वपूर्ण एक्सपो में शामिल होकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज और आविष्कार संस्था की पूरी टीम को इस दूरगामी पहल के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि भौगोलिक रूप से कठिन और दूरदराज क्षेत्र होने के बावजूद चंबा में राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी का आयोजन अपने आप में सराहनीय है।
चंबा की संस्कृति का जम्मू से जुड़ाव, महसूस होती है खास आत्मीयता
राज्यपाल ने कहा कि चंबा केवल प्राकृतिक सुंदरता वाला पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यह प्राचीन मंदिरों, लोक संस्कृति, काष्ठ कला और पारंपरिक हस्तशिल्प का जीवंत प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि चंबा की संस्कृति का जुड़ाव उनके गृह क्षेत्र जम्मू से काफी मिलता-जुलता है, जिससे उन्हें यहां विशेष आत्मीयता महसूस होती है। उन्होंने कहा कि आज भारत एक अभूतपूर्व परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है।
विकास की किरणें अंतिम व्यक्ति और दूरदराज के गांव तक पहुंचें
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भरता और विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए जरूरी है कि विकास की किरणें समाज के अंतिम व्यक्ति और दूरदराज के गांवों तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से समृद्ध होना नहीं, बल्कि ऐसा समाज बनाना है जहां युवाओं को अधिक अवसर मिलें, महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण हो, किसानों की उत्पादकता बढ़े और स्थानीय कारोबार व उद्यमों को व्यापक बाजार उपलब्ध हो।



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