Kangra: टांडा मेडिकल कॉलेज में 10 साल में 60 लाख मरीजों का इलाज, 29 किडनी ट्रांसप्लांट और 100 से ज्यादा ओपन हार्ट सर्जरी; आरएस बाली बोले- संस्थान पर न हो राजनीति

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कांगड़ा में पर्यटन निगम के अध्यक्ष एवं नगरोटा बगवां के विधायक आर.एस. बाली ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का एक प्रमुख केंद्र है। टांडा मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कॉलेज की व्यवस्थाओं, उपलब्धियों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दो प्रमुख मेडिकल कॉलेज शिमला और टांडा हैं, जहां हर वर्ष लाखों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं।

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आर.एस. बाली ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में वर्ष 1999 में एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू हुई थीं। उस समय विकास पुरुष स्वर्गीय जी.एस. बाली यहां के विधायक थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने इस संस्थान की नींव रखी थी। आज इस संस्थान से हजारों डॉक्टर एमबीबीएस की शिक्षा प्राप्त कर लोगों की सेवा में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज के विकास में यहां कार्यरत डॉक्टरों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में टांडा मेडिकल कॉलेज में करीब 60 लाख मरीजों ने उपचार करवाया है, जो हिमाचल प्रदेश की कुल आबादी के लगभग बराबर है। हिमाचल के अलावा अन्य राज्यों से भी मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। हर वर्ष करीब 6 लाख मरीजों का उपचार होना इस संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने के बावजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।

आर.एस. बाली ने कहा कि वर्ष 2009 में टांडा में नर्सिंग स्कूल की शुरुआत भी विकास पुरुष स्वर्गीय जी.एस. बाली के प्रयासों से हुई थी। उस समय जीएनएम की 30 सीटों के साथ नर्सिंग शिक्षा शुरू हुई थी। इसके बाद बीएससी नर्सिंग कॉलेज की शुरुआत करवाई गई, जिसमें 60 सीटें स्वीकृत हुई थीं। अब इन सीटों की संख्या बढ़ाकर 100 कर दी गई है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में टांडा मेडिकल कॉलेज को विभिन्न चिकित्सा पाठ्यक्रमों में करीब 1000 नई सीटें मिली हैं। बीएससी एमएलटी, एनेस्थीसिया टेक्नीशियन और रेडियोलॉजी से संबंधित पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या 18 से बढ़ाकर 60 की गई है। इसके अलावा रेडियोथेरेपी में 30 नए विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है, जबकि पहले इन सीटों की सुविधा नहीं थी। आर.एस. बाली ने इन उपलब्धियों के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त किया।

हर सप्ताह मेडिकल कॉलेज की उपलब्धियों पर होगी प्रेस वार्ता

आर.एस. बाली ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज की उपलब्धियों और यहां उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से अब हर सप्ताह मेडिकल कॉलेज की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी। कॉलेज के विभिन्न विभाग अपने कार्यों, उपलब्धियों और सेवाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करेंगे, ताकि लोगों को यहां उपलब्ध उपचार सुविधाओं की सही जानकारी मिल सके।

उन्होंने बताया कि टांडा मेडिकल कॉलेज में हर वर्ष करीब 40 हजार ऑपरेशन किए जा रहे हैं, जबकि पिछले 10 वर्षों में करीब 4 लाख मरीजों के ऑपरेशन किए जा चुके हैं।

कैथ लैब से अब तक 30 हजार मरीजों का उपचार

आर.एस. बाली ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में हृदय रोगियों के उपचार के लिए कैथ लैब महत्वपूर्ण सुविधा है। इसके माध्यम से एंजियोग्राफी, स्टेंट डालने सहित हृदय रोगों से जुड़ी कई प्रक्रियाएं की जाती हैं। उन्होंने बताया कि पहले यह मशीन केवल आईजीएमसी शिमला में उपलब्ध थी और मरीजों को कई बार उपचार के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि विकास पुरुष स्वर्गीय जी.एस. बाली के प्रयासों से अक्टूबर 2016 में टांडा मेडिकल कॉलेज में कैथ लैब स्थापित की गई थी। वर्तमान समय में इस मशीन की कीमत करीब 9 करोड़ रुपये है। कैथ लैब के माध्यम से पिछले 10 वर्षों में करीब 30 हजार मरीजों का उपचार किया जा चुका है।

आर.एस. बाली ने बताया कि वर्तमान में टांडा में हृदय रोग विशेषज्ञों की संख्या बढ़कर छह हो गई है, जबकि पहले यहां केवल तीन विशेषज्ञ थे। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में तीन नए हृदय रोग विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर 2026 को कैथ लैब की मशीन में तकनीकी खराबी आई थी। इसके आवश्यक पुर्जे बाहर से मंगवाने पड़ते हैं और इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष भी उठाया गया है।

सितंबर 2023 से टांडा में ओपन हार्ट सर्जरी की सुविधा

आर.एस. बाली ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में सीटीवीएस यानी कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी के तहत ओपन हार्ट सर्जरी की सुविधा सितंबर 2023 में शुरू की गई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 से इस सर्जरी से संबंधित मशीनरी उपलब्ध थी, लेकिन आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी नहीं थीं। सितंबर 2023 में व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद इसे मरीजों के लिए शुरू किया गया।

उन्होंने बताया कि अब टांडा में हर सप्ताह करीब दो हृदय ऑपरेशन किए जा रहे हैं। इसके लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं उपलब्ध करवाई गई हैं और अब तक 100 से अधिक ओपन हार्ट सर्जरी और संबंधित प्रक्रियाएं यहां की जा चुकी हैं।

जुलाई 2024 में शुरू हुई किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा

आर.एस. बाली ने कहा कि किडनी की बीमारी का उपचार काफी महंगा होता है और पहले टांडा मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इस दिशा में प्रयास करते हुए जुलाई 2024 में टांडा में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू की गई।

उन्होंने बताया कि अब तक टांडा मेडिकल कॉलेज में 29 मरीजों के किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। इसके अलावा नेफ्रोलॉजी विभाग की ओर से अब तक करीब 2500 रीनल संबंधी प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। कार्डियो विभाग में हर वर्ष करीब 3500 प्रक्रियाएं की गई हैं।

आर.एस. बाली ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य हिमाचल के लोगों को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं अपने ही राज्य में उपलब्ध करवाना है, ताकि गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए मरीजों को दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े। उन्होंने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज को लगातार सुदृढ़ करना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

आर.एस. बाली ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान के ऊपर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संस्थान ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव के समक्ष कैथ लैब की खराबी का मामला रखा गया है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने इसे जल्द ठीक करवाने के साथ नई मशीन लगाने का आश्वासन दिया है। प्रेस वार्ता में आर.एस. बाली के साथ प्रधानाचार्य डॉ. मिलाप और विभिन्न विभागों के प्रमुख चिकित्सक मौजूद रहे।

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