सिरमौर के रेणुकाजी मिनी जू में लंबे समय से चल रहा टाइगर का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों के लिए किसी चिड़ियाघर में रखा जाने वाला टाइगर का पहला जोड़ा रविवार को रेणुकाजी पहुंच गया। महाराष्ट्र के नागपुर जिले स्थित घोड़ेवाला बचाव केंद्र से दोनों बाघों को पुलिस सुरक्षा और वन्य प्राणी विभाग की टीम के साथ कड़ी सुरक्षा में रेणुकाजी लाया गया।
दोनों बाघों ने नागपुर से रेणुकाजी तक करीब 1800 किलोमीटर का सफर तय किया। करीब 43 घंटे की इस लंबी यात्रा के दौरान वन्य प्राणी विभाग की टीम उनके साथ रही। पुलिस सुरक्षा के बीच हुए सफर में बाघों के भोजन, विश्राम और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा गया।
टाइगरों के रेणुकाजी पहुंचते ही वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में खुशी का माहौल बन गया। विभाग की ओर से मिठाई बांटकर इस खास उपलब्धि का जश्न मनाया गया। रेणुकाजी में टाइगर का जोड़ा लाने के लिए करीब एक दशक से प्रयास किए जा रहे थे। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बाघों के लिए आधुनिक बाड़ा तैयार करने पर 1.67 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा वन्य प्राणी अस्पताल भी तैयार किया गया है।
10 दिन चिकित्सकों की निगरानी में रहेंगे बाघ
रेणुकाजी पहुंचने के बाद दोनों बाघों को तुरंत पर्यटकों के सामने नहीं लाया जाएगा। फिलहाल उन्हें अंदरूनी वार्ड में रखा गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनके स्वास्थ्य और व्यवहार पर नजर रखी जा रही है।
अगले करीब 10 दिनों तक दोनों बाघों को रेणुकाजी के नए वातावरण के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद उन्हें बाहरी बाड़े में स्थानांतरित करने की तैयारी है। हालिया विभागीय जानकारी के अनुसार, पर्यटकों को दो अक्तूबर से रेणुकाजी में पहली बार इन बाघों को देखने का अवसर मिल सकता है।
नर बाघ की उम्र करीब पांच वर्ष और मादा बाघ की उम्र करीब तीन वर्ष बताई गई है। विभाग की ओर से दोनों का नामकरण किए जाने के बाद उन्हें पर्यटकों के लिए बाड़े में छोड़े जाने की तैयारी की जा रही है।
दस साल का इंतजार हुआ खत्म
रेणुकाजी में टाइगर का जोड़ा पहुंचने के साथ ही करीब दस साल से चल रहा इंतजार समाप्त हो गया है। वन्य प्राणी विभाग की अरण्यपाल प्रीति भंडारी ने बाघों के सुरक्षित पहुंचने पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने बताया कि हिमाचल में पर्यटकों के आकर्षण के लिए टाइगर का यह पहला जोड़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों बाघों को रेणुकाजी तक लाने के लिए विभाग को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा और विभिन्न औपचारिकताएं पूरी करने में कई वर्ष लगे।
बाघों को सुरक्षित रेणुकाजी पहुंचाने वाली टीम में वन्य प्राणी विभाग के प्रभागीय वन अधिकारी डॉ. शाहनवाज अहमद भट्ट, वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. कार्तिक सिंह चौधरी, रेणुका के क्षेत्रीय अधिकारी राकेश कुमार सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे।
अब वन्य प्राणी विभाग की निगरानी में दोनों बाघों को रेणुकाजी के वातावरण के अनुरूप ढाला जा रहा है। टाइगर का जोड़ा पर्यटकों के लिए कब से नियमित रूप से उपलब्ध होगा, यह स्वास्थ्य निगरानी और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तय किया जाएगा।



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