शिमला। पुरानी पेंशन योजना की बहाली समेत अन्य लंबित मांगों को लेकर हिमाचल राज्य बिजली बोर्ड के कर्मचारियों, इंजीनियरों और पेंशनरों का सब्र बुधवार को टूट गया। प्रदेश सरकार और बोर्ड प्रबंधन के खिलाफ कर्मचारियों ने राजधानी शिमला में विधानसभा के बाहर चौड़ा मैदान में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदेशभर से पहुंचे 2000 से 2500 के करीब कर्मचारियों और पेंशनरों ने एकजुटता दिखाते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कुमार हाउस से चौड़ा मैदान तक निकली आक्रोश रैली
हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड एम्पलाइज यूनियन के आह्वान और विद्युत बोर्ड की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के समर्थन में यह आंदोलन किया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार बुधवार सुबह 11 बजे कुमार हाउस से आक्रोश रैली शुरू हुई। रैली अंबेदकर चौक होते हुए चौड़ा मैदान पहुंची, जहां यह बड़े धरने में तब्दील हो गई।
रैली में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से कर्मचारी और पेंशनर शामिल हुए। भारी संख्या में लोगों के पहुंचने से राजधानी के मुख्य मार्गों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और जाम की स्थिति बन गई। स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग बिजली बोर्ड में पुरानी पेंशन योजना को तुरंत बहाल करने की है। इसके साथ ही बोर्ड में खाली पड़े पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाने की मांग भी उठाई गई।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री की ओर से कर्मचारियों के हित में की गई घोषणाओं को जल्द लागू करने और कर्मचारियों व पेंशनरों के सेवानिवृत्ति लाभों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।
कर्मचारियों ने ताज मोहम्मद मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को लागू करने, स्मार्ट मीटर नीति की समीक्षा करने और पदोन्नति में पहले की तरह कैडर-कंट्रोलिंग अथॉरिटी की व्यवस्था बहाल करने की मांग भी रखी।
इसके अलावा नॉन-आईटीआई फील्ड स्टाफ की पदोन्नति में हो रहे कथित भेदभाव को खत्म करने तथा विद्युत मंडल पांगी और शिमला-2 में एएलएम और एलएम के नए पद सृजित करने की मांग भी प्रदर्शन के दौरान उठाई गई।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा और तेज
प्रदर्शन के दौरान एम्पलाइज यूनियन और ज्वाइंट एक्शन कमेटी के नेताओं ने प्रदेश सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया। नेताओं ने कहा कि सरकार को समयबद्ध तरीके से कर्मचारियों की सभी लंबित मांगों का समाधान करना होगा।
यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और बोर्ड प्रबंधन ने अब भी मांगों को लेकर टालमटोल का रवैया अपनाया, तो आने वाले दिनों में कर्मचारी अपने हकों के लिए आंदोलन को और तेज करेंगे। नेताओं ने कहा कि इसके लिए पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।




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