चौहार घाटी की 7000 फीट ऊंचाई पर सदियों पुरानी झील संकट में, 90% सूखी तो बढ़ी चिंता; क्या बचेगी प्राकृतिक धरोहर?

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चौहार घाटी की बरोट पंचायत में करीब सात हजार फीट की ऊंचाई पर हेडगियर के सूरजपुर गढ़ नामक स्थान पर स्थित सदियों पुरानी प्राकृतिक झील इन दिनों अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। भारी हिमपात के बावजूद कभी पानी से लबालब रहने वाली धार्मिक महत्व की यह झील अब करीब 90 प्रतिशत तक सूख चुकी है। झील की लगातार बिगड़ती स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में चिंता बढ़ गई है।

बरोट पंचायत के कथयाडू गांव निवासी पर्यावरण प्रेमी तेजमल ठाकुर और थुजी गांव के वजिन्द्र सिंह ने बताया कि प्राचीन समय में प्राकृतिक तौर पर निकले पानी से यह झील करीब 300 मीटर लंबी और 100 मीटर चौड़ी बनी हुई थी। पर्याप्त पानी होने के कारण यह झील स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र रही है।

धार्मिक महत्व के कारण स्थानीय लोगों के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु भी बीस भादो तथा चैत्र माह की बीस प्रविष्टे को यहां पवित्र स्नान करते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार इस झील को पुराने डेहनसर के नाम से भी जाना जाता है। लंबे समय तक यह क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बनी रही।

तेजमल ठाकुर और वजिन्द्र सिंह के अनुसार पिछले कई वर्षों से किसी कारणवश झील में पानी का स्तर लगातार कम होता गया। कभी पानी से भरी रहने वाली यह झील अब अपने पुराने स्वरूप को खो चुकी है। वर्तमान में इसका करीब 90 प्रतिशत हिस्सा सूख गया है, जिससे झील के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है।

स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राकृतिक और धार्मिक धरोहर है। यदि झील इसी तरह सूखती रही तो आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक स्थल से वंचित हो सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से झील का निरीक्षण करवाने और इसके संरक्षण के लिए ठोस योजना तैयार करने की मांग की है।

पर्यावरण प्रेमियों ने झील के प्राकृतिक जलस्रोतों का अध्ययन करवाने के साथ पानी को रोकने के संभावित उपाय तलाशने की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन और स्थानीय लोग समय रहते इसके संरक्षण के लिए प्रयास नहीं करते हैं तो यह पवित्र झील भविष्य में केवल इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह सकती है।

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