हिमाचल के फोरलेन पर बदल सकती है स्पीड लिमिट, अब कितनी होगी नई रफ्तार? पूरी जानकारी जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

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हिमाचल में फोरलेन पर अब 70+ की रफ्तार! 60 kmph की सीमा बढ़ाने की तैयारी, जानें सरकार ने क्यों लिया बड़ा फैसला

हिमाचल प्रदेश में फोरलेन हाईवे पर वाहन चलाने वालों के लिए बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में कहा कि प्रदेश में फोरलेन हाईवे पर मौजूदा 60 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा को बढ़ाकर 70 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक किया जाएगा। हालांकि, गति सीमा बढ़ाने से पहले परिवहन विभाग सर्वेक्षण करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अधिक रफ्तार से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा न बढ़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी राज्य में हाईवे की स्थिति और सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है। ऐसे में वाहन चालक कई बार अनजाने में 60 किलोमीटर प्रति घंटा की मौजूदा सीमा पार कर जाते हैं। हिमाचल आने वाले अधिकांश पर्यटक दूसरे राज्यों से होते हैं और उन्हें प्रदेश में लागू गति सीमा की जानकारी नहीं होती। इसके चलते कई वाहन चालकों के ऑटोमैटिक चालान हो जाते हैं।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वर्ष 1 जनवरी से 30 अप्रैल के बीच हिमाचल प्रदेश में ओवरस्पीडिंग के 1,28,472 चालान किए गए थे। यह संख्या वर्ष 2024 की इसी अवधि में जारी किए गए 17,260 चालानों से करीब सात गुना अधिक थी। इनमें मनाली और शिमला जाने वाले मार्गों पर सबसे अधिक चालान हुए थे।

60 kmph की सीमा पर पहले भी उठे सवाल

फोरलेन हाईवे पर 60 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। 20 मई को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने किरतपुर-मनाली हाईवे के कुछ हिस्सों पर लागू 60 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा पर पुनर्विचार करने को कहा था। अब सरकार की ओर से गति सीमा बढ़ाने के संकेत मिलने से माना जा रहा है कि ओवरस्पीडिंग के बढ़ते चालानों को कम करने की दिशा में भी कदम उठाया जा रहा है।

सरकार के अनुसार गति सीमा बढ़ाने का अंतिम फैसला परिवहन विभाग के सर्वेक्षण के बाद किया जाएगा। सर्वेक्षण में यह देखा जाएगा कि अलग-अलग फोरलेन हिस्सों पर अधिक गति से वाहन चलाना सुरक्षित है या नहीं और इससे दुर्घटनाओं की स्थिति तो नहीं बढ़ेगी।

भूमि अधिग्रहण की लागत पर भी केंद्र से असहमति

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने फोरलेन परियोजनाओं से जुड़े केंद्र के नए नियमों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि फोरलेन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की लागत राज्य सरकार को ही वहन करनी है, तो फिर राज्य को सड़क निर्माण करने और टोल से राजस्व जुटाने की अनुमति भी मिलनी चाहिए।

हिमाचल में फोरलेन हाईवे के विस्तार के साथ यातायात व्यवस्था और गति सीमा को लेकर बहस लगातार तेज हुई है। अब परिवहन विभाग के सर्वेक्षण के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रदेश के फोरलेन मार्गों पर 60 किलोमीटर प्रति घंटा की मौजूदा सीमा कितनी बढ़ाई जा सकती है।

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