बिल-वाउचर में हेराफेरी कर सरकारी सब्सिडी लेने का आरोप, पिता-बेटे समेत 3 पर केस; जांच में चौंकाने वाले खुलासे

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कांगड़ा के जवाली क्षेत्र में बागवानी विभाग की योजनाओं के तहत फर्जी बिल-वाउचर और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए लाखों रुपये की सरकारी सब्सिडी लेने के मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो ने जांच तेज कर दी है। ब्यूरो ने संबंधित विभाग से रिकॉर्ड मांगा है और ठेकेदारों, फर्मों तथा अन्य मजदूरों को किए गए भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। मामले में पिता-बेटे सहित तीन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और 201 के तहत केस दर्ज किया गया है।

ब्यूरो की सत्यापन जांच में टिशू कल्चर यूनिट समेत बागवानी विभाग की अन्य योजनाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। जांच के अनुसार, वर्ष 2020 में टिशू कल्चर यूनिट स्थापित करने के लिए करीब 93.48 लाख रुपये का खर्च दर्शाया गया और इसके आधार पर 36.42 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी प्राप्त की गई। जांच के दौरान कई बिलों और दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां पाई गईं।

एक व्यक्ति के नाम से मिला ऐसा बिल, पंचायत रिकॉर्ड में अस्तित्व नहीं

जांच में एक बिल ऐसे व्यक्ति के नाम से मिला, जिसका पंचायत रिकॉर्ड में कोई अस्तित्व नहीं पाया गया। वहीं, एक अन्य फर्म के वास्तविक बिल की तुलना में विभागीय रिकॉर्ड में कई गुना अधिक राशि दर्शाई गई। एक ठेकेदार ने भी अपने नाम पर दर्शाए गए लाखों रुपये के काम और बिल जारी करने से इनकार किया है।

इसके अलावा आरोपी के पिता के नाम पर तीन पॉलीहाउस और एक फल पौधरोपण परियोजना के लिए करीब 20.30 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त करने का मामला भी जांच के दायरे में आया है। मौके पर कुछ संरचनाएं स्थापित मिलीं, लेकिन परिवार के सदस्यों द्वारा अलग-अलग नामों से योजनाओं का बार-बार लाभ लेने के कारण आपसी मिलीभगत और सरकारी योजनाओं के संगठित दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।

6.99 लाख की सब्सिडी वाला पॉलीहाउस मौके पर नहीं मिला

जांच के दौरान एक अन्य मामले में 6.99 लाख रुपये की सब्सिडी से संबंधित पॉलीहाउस मौके पर नहीं मिला। रिकॉर्ड में एक व्यक्ति का नाम और दूसरे व्यक्ति की फोटो मिलने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा रिकॉर्ड नष्ट किए जाने के तथ्य भी जांच में सामने आए हैं।

ब्यूरो अब पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों और भुगतान रिकॉर्ड की गहन जांच कर रहा है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और बिल-वाउचर कैसे तैयार किए गए तथा इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

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