धर्मशाला में ‘विशाल भारत’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत की सांस्कृतिक चेतना, अखंड भारत की अवधारणा और क्षेत्रीय शांति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन हुआ। श्री सत्य साईं एजुकेयर विद्या प्रतिष्ठान में राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच की ओर से आयोजित यह एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी देशभर में आयोजित किए जा रहे 25 कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा रही। कार्यक्रम में ‘विशाल भारत’ की अवधारणा को सांस्कृतिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक दृष्टि से समझने पर विचार-विमर्श किया गया।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि भारत की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी चिरंतन सांस्कृतिक चेतना से है। उन्होंने अखंड भारत की अवधारणा और भारत विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
मुख्य अतिथि गोलोक बिहारी राय ने कहा कि ‘विशाल भारत’ किसी निश्चित भौगोलिक सीमा तक सीमित अवधारणा नहीं है, बल्कि यह एक दार्शनिक विचार है। उन्होंने अपने संबोधन में क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के साथ ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर डॉ. ओ.एस.के. सुब्रमणियन शास्त्री ने की। संगोष्ठी के दौरान शहीद वजीर राम सिंह पठानिया की स्मृति में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके अलावा इतिहासकार ठाकुर राम सिंह की स्मृति में पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई।
कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर प्रवीण शर्मा ने किया। संगोष्ठी में ‘विशाल भारत’ की अवधारणा से जुड़े सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक पहलुओं के साथ क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषयों पर विचार साझा किए गए।




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