हिमाचल प्रदेश में 1,190 आंगनबाड़ी केंद्र आज भी बिजली सुविधा से वंचित हैं। यह जानकारी प्रश्नकाल के दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल ने भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। प्रदेश में वर्तमान में 18,925 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनमें 4,24,362 बच्चे पंजीकृत हैं।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश के कुल आंगनबाड़ी केंद्रों में से 8,417 सरकारी भवनों और 10,508 निजी भवनों में चल रहे हैं। 31 जुलाई 2026 तक राज्य में 18,549 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 17,990 सहायिकाएं कार्यरत थीं। सरकारी भवनों में संचालित 8,417 केंद्रों में से 5,378 में बिजली के मीटर कनेक्शन उपलब्ध हैं, जबकि 1,849 केंद्रों में बिजली की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन कनेक्शन नहीं है।
निजी भवनों में चल रहे 10,508 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 5,676 में मीटर बिजली कनेक्शन हैं। 4,826 केंद्रों में बिजली की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन कनेक्शन नहीं है। केवल छह निजी केंद्र ऐसे हैं, जहां बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
पेयजल सुविधा की बात करें तो सरकारी भवनों में संचालित कुल 8,417 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 8,268 में पाइप कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध है। शेष 149 भवनों में अन्य स्रोतों से पानी की व्यवस्था है। सरकार के अनुसार वर्तमान में कोई भी सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र पेयजल सुविधा से वंचित नहीं है।
निजी भवनों में चल रहे 10,508 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 10,452 में पाइप कनेक्शन से पेयजल उपलब्ध है, जबकि शेष 56 भवनों में अन्य स्रोतों से पानी की व्यवस्था की गई है। निजी भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद पड़े सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित करने के सवाल पर सरकार ने बताया कि शिक्षा विभाग से अभी कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। प्रस्ताव मिलने पर विभाग उस पर विचार करेगा।
कम नामांकन और बढ़ते खर्च के चलते बंद हुईं प्राथमिक स्कूलों की खेलकूद प्रतियोगिताएं
प्रदेश सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में आयोजित होने वाली खेलकूद प्रतियोगिताओं को बंद करने के फैसले का विधानसभा में बचाव किया है। शिक्षा मंत्री की ओर से दिए गए लिखित उत्तर में बताया गया कि प्राथमिक स्तर की खेल प्रतियोगिताओं का अंतिम आयोजन शैक्षणिक सत्र 2024-25 में ब्लॉक स्तर पर हुआ था। इसके बाद विभिन्न कारणों को देखते हुए इन प्रतियोगिताओं को अलग से आयोजित नहीं करने का निर्णय लिया गया।
भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज के प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने कहा कि प्रदेश में छात्र संख्या लगातार घट रही है और सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में नामांकन कम होने के कारण इन प्रतियोगिताओं के अलग आयोजन की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। साथ ही प्राथमिक विद्यालय श्रेणी की प्रतियोगिताओं का राष्ट्रीय स्तर पर कोई प्रावधान नहीं होने के कारण अपेक्षित खेल विकास का लाभ भी नहीं मिल रहा था।
सरकार ने वित्तीय पक्ष का भी हवाला दिया। बताया गया कि इन प्रतियोगिताओं पर हर वर्ष करीब एक करोड़ रुपये खर्च होते थे। सरकार के अनुसार यही राशि विद्यालयों में खेल सुविधाओं को मजबूत करने में अधिक उपयोगी साबित हो सकती है। इसके अलावा अगस्त से नवंबर तक प्रतियोगिताओं के आयोजन से पढ़ाई प्रभावित होती थी और शिक्षकों का काफी समय आयोजन से जुड़े कार्यों में खर्च हो जाता था।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की स्कूल खेल प्रतियोगिताएं अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 आयु वर्ग में आयोजित होती हैं। 12 से 14 वर्ष की आयु वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थी अंडर-14 प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं। ऐसे में सरकार ने अलग से प्राथमिक स्तर की खेल प्रतियोगिताओं की आवश्यकता नहीं मानी।
शिक्षा मंत्री के अनुसार समीक्षा में यह भी सामने आया कि प्राथमिक स्तर की प्रतियोगिताओं में विशेषज्ञ पर्यवेक्षण का अभाव रहता था। इससे कम आयु के बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती थी। इसके अलावा विद्यार्थियों की भागीदारी सीमित होने और कई मौकों पर प्रतिभागी छात्रों की तुलना में आयोजक शिक्षकों तथा कर्मचारियों की संख्या अधिक होने के कारण भी ये प्रतियोगिताएं अपने उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पा रही थीं।




For advertisements inquiries on HIM Live TV, Kindly contact us!
Connect with us on Facebook and WhatsApp for the latest updates!


