राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने हिमाचल प्रदेश वन विभाग को संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित करीब 200 साल पुराने बरगद के पेड़ के चारों ओर बनाए जा रहे सुरक्षा चबूतरे को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने पूछा है कि पेड़ के आसपास यह चबूतरा किस आधार पर बनाया गया और इसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।

यह निर्देश NGT की प्रधान पीठ ने 11 अगस्त को ‘परमजीत मनकोटिया बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य व अन्य’ याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए। पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफ़रोज़ अहमद शामिल थे।
पेड़ की सुरक्षा के लिए चबूतरा बनाने का दिया गया था तर्क
याचिकाकर्ता ने शिकायत में आरोप लगाया था कि संरक्षित वन क्षेत्र में मौजूद प्राचीन बरगद के पेड़ के चारों ओर आवश्यक अनुमति के बिना चबूतरे का निर्माण किया जा रहा है। इसके जवाब में अधिकारियों ने बताया कि निर्माण का उद्देश्य करीब 200 साल पुराने पेड़ की सुरक्षा करना, उसकी जड़ों के पास मिट्टी के कटाव को रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

अधिकारियों के अनुसार पेड़ की अत्यधिक उम्र, क्षेत्र में लोगों की भारी आवाजाही, पास में स्थित सरकारी स्कूल और लगातार होने वाली भारी बारिश तथा प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से यह छोटा चबूतरा बनाया जा रहा था। अधिकारियों ने यह भी बताया कि निर्माण कार्य को पहले ही रोक दिया गया है।

NGT ने पूछा, किसकी अनुमति से बना चबूतरा?
सुनवाई के दौरान NGT ने कहा कि इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि बरगद का पेड़ संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित है। ऐसे में उत्तरदाताओं को स्पष्ट करना होगा कि पेड़ को घेरने वाले चबूतरे का निर्माण किस तरह किया गया और इस ढांचे के निर्माण के लिए किस प्राधिकरण से अनुमति ली गई थी।
NGT ने हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव (वन) को छह सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर पूरी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।

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