हिमाचल में मछुआरों को बड़ी राहत: 50 हजार की नाव पर मिलेगी 35 हजार की सब्सिडी, जाल भी 90% सस्ता

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने मछली पकड़ने का काम करने वाले लोगों के लिए दो नई अनुदान योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं के तहत पात्र मछुआरों को नाव और मछली पकड़ने के जाल खरीदने पर बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। फिशिंग बोट सब्सिडी योजना के तहत 50 हजार रुपये की नाव पर सरकार 35 हजार रुपये यानी 70 फीसदी अनुदान देगी। वहीं कास्ट नेट और गिल नेट पर 90 फीसदी सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।

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सरकार के अनुसार इन योजनाओं का उद्देश्य मछुआरों के काम को आसान बनाना, उनकी सुरक्षा और कार्यक्षमता बढ़ाना तथा आय के अवसरों को मजबूत करना है। फिशिंग बोट सब्सिडी योजना का लाभ प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में मछली पकड़ने वाले पात्र मछुआरों को मिलेगा।

50 हजार की नाव पर सरकार देगी 35 हजार रुपये

फिशिंग बोट सब्सिडी योजना के तहत एक नाव की लागत 50 हजार रुपये निर्धारित की गई है। इसमें सरकार की ओर से 35 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी, जबकि लाभार्थी मछुआरे को केवल 15 हजार रुपये खर्च करने होंगे। योजना का उद्देश्य मछुआरों के पुराने नौका बेड़े को आधुनिक बनाना है, जिससे उन्हें मछली पकड़ने के दौरान बेहतर और सुरक्षित सुविधा मिल सके।

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इस योजना का लाभ गोबिंद सागर, पौंग डैम, चमेरा, रणजीत सागर और कोल डैम जैसे प्रमुख जलाशयों में मछली पकड़ने वाले पात्र मछुआरों को मिलेगा। सरकार का कहना है कि बेहतर नाव उपलब्ध होने से मछुआरों की सुरक्षा, काम करने की क्षमता और आय के अवसर बढ़ेंगे।

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का पंजीकृत प्राथमिक मत्स्य सहकारी समिति का सक्रिय सदस्य होना जरूरी है।

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3 हजार का कास्ट नेट सिर्फ 300 रुपये में

मछुआरों के लिए सरकार ने सब्सिडाइज्ड फिशिंग गियर योजना भी शुरू की है। इसके तहत कास्ट नेट और गिल नेट पर 90 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी। नदी क्षेत्र में मछली पकड़ने वाले मछुआरों को 3,000 रुपये कीमत का कास्ट नेट केवल 300 रुपये में मिलेगा।

इसी तरह जलाशय क्षेत्र में मछली पकड़ने वाले मछुआरों को 5,000 रुपये का गिल नेट सिर्फ 500 रुपये में उपलब्ध कराया जाएगा। इससे मछुआरों को कम कीमत पर जरूरी उपकरण मिल सकेंगे और आधुनिक फिशिंग गियर तक उनकी पहुंच बढ़ेगी।

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ग्रामीण युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल में ‘ब्लू इकॉनमी’ को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करना है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से मछुआरों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

सरकार का मानना है कि नाव और फिशिंग गियर पर सब्सिडी मिलने से मछुआरों का काम आसान होगा और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही प्रदेश में मछली उत्पादन और इससे होने वाली आय को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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