पूर्व DGP संजय कुंडू को बड़ी राहत! हाईकोर्ट ने धमकाने की शिकायत पर स्वतः संज्ञान वाली कार्यवाही की समाप्त

शिमला, 11 जुलाई। हिमाचल प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय कुंडू को बड़ी कानूनी राहत मिली है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने पालमपुर के एक होटल कारोबारी द्वारा लगाए गए धमकाने के आरोपों पर स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई कार्यवाही को समाप्त कर दिया है। अदालत ने साथ ही संजय कुंडू को होटल कारोबारी निशांत शर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किए जाने संबंधी रिपोर्ट का कानूनी तौर पर विरोध करने की अनुमति भी दे दी है।

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मुख्य न्यायाधीश जी. एस. संधवालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। यह मामला उस समय शुरू हुआ था जब 28 अक्टूबर 2023 को होटल कारोबारी निशांत शर्मा ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को ई-मेल और एक आवेदन भेजकर आरोप लगाया था कि तत्कालीन डीजीपी संजय कुंडू ने उन्हें धमकाने की कोशिश की है। शिकायत में न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग भी की गई थी।

इन आरोपों को गंभीर मानते हुए उच्च न्यायालय ने 10 नवंबर 2023 को स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। शिकायत में कहा गया था कि राज्य के सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने शिकायतकर्ता को डराने और दबाव बनाने का प्रयास किया।

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सुनवाई के दौरान संजय कुंडू की ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतों और ई-मेल के माध्यम से उनकी छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

अदालत ने अपने आदेश में विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार निशांत शर्मा ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाए थे। एसआईटी ने निष्कर्ष निकाला कि शिकायतकर्ता ने न्यायिक प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करने, जांच के निष्कर्षों से ध्यान हटाने और कारोबारी विवाद में बढ़त हासिल करने के उद्देश्य से झूठी शिकायत दर्ज कराई थी।

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इन्हीं तथ्यों के आधार पर उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान वाली पूरी कार्यवाही को समाप्त कर दिया।

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