हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित शूलिनी विश्वविद्यालय के एक पूर्व छात्र की आत्महत्या का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। मृतक के परिजनों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन और एक महिला फैकल्टी पर मानसिक प्रताड़ना और प्लेसमेंट के नाम पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि युवक ने फंदा लगाने से पहले अपने माता-पिता को फोन कर आखिरी बार बात की थी, जिसके बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया है।
नितिन के अंतिम संस्कार के बाद बुधवार को घर में आयोजित शुद्धि संस्कार के दौरान परिवार का दर्द सामने आया। पिता कल्याण सिंह चौहान ने बताया कि उनके बेटे ने सुसाइड नोट में अपनी पूरी आपबीती लिखी है। परिजनों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में ‘अवनी’ नाम की एक महिला फैकल्टी नितिन को लगातार मानसिक रूप से परेशान कर रही थी, जिसका जिक्र सुसाइड नोट में भी किया गया है।
नितिन की मां प्रोमिला चौहान ने बताया कि उनका बेटा अक्सर फोन पर अपनी परेशानी साझा करता था। उन्होंने कई बार उसे पढ़ाई छोड़कर घर आने को कहा, लेकिन वह अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता था। परिवार ने विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट सिस्टम पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नितिन को 50 हजार रुपये महीने के पैकेज का वादा कर एक कंपनी में भेजा गया, लेकिन वहां उसे केवल 25 हजार रुपये दिए गए। इतना ही नहीं, उससे साफ-सफाई जैसे काम करवाए गए और देर रात तक काम लेकर मानसिक दबाव बनाया गया।
परिजनों का आरोप है कि जब नितिन ने इस शोषण के खिलाफ विश्वविद्यालय से मदद मांगी, तो वहां से भी उसे राहत नहीं मिली, बल्कि और अधिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। नितिन के पिता ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने घर का इकलौता चिराग खो दिया है और अब वे इस मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना दोबारा किसी और छात्र के साथ न हो।
इस दौरान विश्वविद्यालय प्रबंधन के कुछ प्रतिनिधि भी नितिन के घर पहुंचे, जहां उन्हें परिजनों के गुस्से और सवालों का सामना करना पड़ा। फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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