कई बार असफल, फिर भी नहीं माने हार… राजगढ़ के पार्थ बने इंडियन एयर फोर्स के फ्लाइंग ऑफिसर, पूरे क्षेत्र में जश्न

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मन के हारे हार और मन के जीते जीत—इस कहावत को सच कर दिखाया है उपमंडल राजगढ़ की सेर जगास पंचायत के रतोली गांव के पार्थ चौहान ने। कई बार असफल होने के बाद भी उन्होंने अपने सपने का पीछा करना नहीं छोड़ा और आखिरकार इंडियन एयर फोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर के लिए चयनित होकर बड़ी सफलता हासिल की। पार्थ ने ऑल इंडिया मेरिट में 63वां रैंक पाने का कमाल किया है। अब वे जल्द ही एएफए डुंडीगल में अपनी ट्रेनिंग शुरू करेंगे, जिसके बाद वे भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी और गर्व की लहर है।

पार्थ की शुरुआती पढ़ाई डीएवी राजगढ़ से हुई। इसके बाद उन्होंने जमा दो और ग्रेजुएशन चंडीगढ़ से पूरा किया। बचपन से ही रक्षा सेवाओं में करियर बनाने का सपना रखने वाले पार्थ ने 12वीं के बाद एनडीए और विभिन्न तकनीकी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। हालांकि शुरुआत में उन्हें कई बार असफलता मिली, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

कॉलेज के दौरान एनसीसी में शामिल होना उनके जीवन का बड़ा turning point साबित हुआ। उनकी लगन और क्षमता ने उन्हें कई महत्वपूर्ण अवसर दिलाए। वर्ष 2024 में युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत पूरे देश से सिर्फ 16 कैडेट्स का चयन नेपाल यात्रा के लिए हुआ था, जिनमें पार्थ भी शामिल थे। इसके अलावा गणतंत्र दिवस शिविर 2023 में वे पीएम रैली के दौरान उत्तर जोन कंटिजेंट कमांडर रहे। इन उपलब्धियों ने उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास को बेहद मजबूत बनाया।

पार्थ का सफर आसान नहीं था। कई असफलताओं के बावजूद उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया। निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प के चलते उन्हें अंततः भारतीय वायुसेना के साथ-साथ इंडियन आर्मी के लिए भी अनुशंसा मिली। उनकी यह कहानी बताती है कि लगातार प्रयास ही सफलता का रास्ता बनाते हैं।

अपनी सफलता पर पार्थ ने कहा कि यह उपलब्धि भगवान की कृपा और परिवार के मजबूत समर्थन से ही संभव हुई। उन्होंने माता-पिता, ताया-तायी, बड़े भाइयों डॉ. विनोद चौहान, विक्सित चौहान, भाभी डॉ. मोनिका सूद और अपनी बहनों अंचल, मृदुला और अक्षिता का विशेष आभार जताया। उन्होंने बताया कि उनके दोस्तों ने भी हमेशा उन्हें प्रेरित किया, इसलिए यह सफलता सिर्फ उनकी नहीं बल्कि सबकी जीत है।

पार्थ चौहान की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे राजगढ़ क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। उनका संघर्ष, समर्पण और जुनून उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक मिसाल है, जो भारतीय सशस्त्र बलों में करियर बनाने का सपना देखते हैं।

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