Hamirpur: लदरौर कलां में मेधावी बेटियों का सम्मान, महिलाओं को मिली योजनाओं की जानकारी

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हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के भोरंज उपमंडल के लदरौर कलां में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य समाज में बेटियों के महत्व को उजागर करना और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देना था। इस अवसर पर न केवल मेधावी छात्राओं को सम्मानित किया गया बल्कि महिलाओं को सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता और मुख्य उद्देश्य

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय पंचायत प्रधान मोनिका देवी ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बेटियां हमारे समाज और परिवार की नींव हैं। बेटियों का सशक्तिकरण समाज को मजबूत बनाने का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने कहा कि जब बेटियां शिक्षित और सक्षम बनेंगी तभी समाज और राष्ट्र सही मायने में प्रगति कर सकेगा।

योजनाओं की जानकारी

इस अवसर पर बाल विकास परियोजना भोरंज की पर्यवेक्षक आशा रानी ने उपस्थित महिलाओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। इनमें प्रमुख योजनाएं निम्नलिखित थीं:

1. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना – जिसका उद्देश्य लिंगानुपात को संतुलित करना और बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देना है।

2. बेटी है अनमोल योजना – जिसके अंतर्गत बेटियों के जन्म पर आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है ताकि उन्हें बेहतर भविष्य दिया जा सके।

3. पोषण अभियान – माताओं और बच्चों में कुपोषण को दूर करने के लिए यह योजना चलाई जा रही है।

4. इसके अलावा विभाग द्वारा महिलाओं और बच्चों के लिए चलाई जा रही अन्य योजनाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।


इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उनके स्वास्थ्य में सुधार करना और बेटियों को शिक्षा व सशक्तिकरण की ओर प्रेरित करना है।



मेधावी बेटियों का सम्मान

कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण था क्षेत्र की मेधावी छात्राओं को सम्मानित करना। दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली नौ बेटियों को इस अवसर पर पुरस्कृत किया गया। इन छात्राओं के नाम हैं:

• कनिका

• रजनी

• पूर्वांशी

• सुनिधि

• वाणी रणौत

• प्रियांशी

• आंशिका

• शगुन

• दिव्या धीमान

इन सभी छात्राओं को स्मृति चिन्ह और सामान्य ज्ञान की पुस्तकें भेंट की गईं। इस सम्मान का उद्देश्य बेटियों को प्रोत्साहित करना और समाज में यह संदेश देना था कि यदि बेटियों को अवसर दिया जाए तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर सकती हैं।

पोषण स्टॉल और महिलाओं की भागीदारी

इस कार्यक्रम में स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और महिलाओं द्वारा पोषण स्टॉल भी लगाए गए। इन स्टॉल्स पर पोषण से संबंधित जानकारी, संतुलित आहार की महत्ता और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं को साझा किया गया। महिलाओं ने इसमें सक्रिय भागीदारी दिखाई और विभिन्न स्वास्थ्य व पोषण संबंधी जानकारियां हासिल कीं।

महिलाओं की बड़ी उपस्थिति

कार्यक्रम में स्थानीय महिला मंडल की प्रधान अंजू देवी, उपप्रधान आशा कुमारी, संदेश कुमारी, सुरेशां कुमारी, मनीषा ठाकुर, पूजा, कृति, प्रीति और अन्य कई महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस अवसर पर आंगनवाड़ी कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं भी मौजूद रहीं। उनकी उपस्थिति ने यह साबित किया कि समाज में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है और महिलाएं अब स्वयं भी आगे आकर अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग हो रही हैं।

समाज के लिए प्रेरणा

लदरौर कलां का यह कार्यक्रम समाज के लिए प्रेरणादायक है। इसने यह संदेश दिया कि बेटियां केवल परिवार का गौरव ही नहीं बल्कि देश का भविष्य भी हैं। यदि उन्हें शिक्षा, सम्मान और अवसर दिए जाएं तो वे समाज की दिशा और दशा बदल सकती हैं।

“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियान का सीधा संबंध केवल शिक्षा से ही नहीं है, बल्कि यह समाज में मानसिकता बदलने का भी प्रयास है। यह अभियान बताता है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं और वे हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ सकती हैं।

निष्कर्ष

लदरौर कलां में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल बेटियों को प्रोत्साहित करने का एक माध्यम था, बल्कि समाज को जागरूक करने की दिशा में एक ठोस कदम भी था। मेधावी छात्राओं का सम्मान समाज के लिए यह प्रेरणा है कि बेटियों को समान अवसर देकर उन्हें आगे बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का भी प्रयास किया गया।

हिमाचल प्रदेश के गांवों में इस तरह के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह केवल कार्यक्रम भर नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति की शुरुआत है।

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