Hamirpur: संतुलित आहार से बनेगा सशक्त समाज : राष्ट्रीय पोषण माह पर हमीरपुर में विशेष कार्यक्रम

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हमीरपुर ज़िले में राष्ट्रीय पोषण माह (Poshan Maah 2025) के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन ग्राम पंचायत चंगर में किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों, को संतुलित आहार, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में जागरूक करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत प्रधान अनिल शर्मा ने की और मुख्य अतिथि के रूप में आयुष विभाग की डॉक्टर आशा मौजूद रहीं।

संतुलित आहार क्यों है जरूरी?

संतुलित आहार हमारे जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। जब हम भोजन में सभी पोषक तत्व—जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज—सही मात्रा में शामिल करते हैं, तो शरीर को ऊर्जा मिलती है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। डॉक्टर आशा ने महिलाओं को विशेष रूप से जागरूक करते हुए कहा कि अधिक मात्रा में चीनी (Sugar), नमक (Salt), तेल (Oil) और मैदा (Refined Flour) का उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

• अधिक चीनी मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग का कारण बन सकती है।

• अत्यधिक नमक से उच्च रक्तचाप और किडनी की बीमारियां हो सकती हैं।

• अधिक तेल और वसा मोटापा व हृदय रोग का कारण बनते हैं।

• मैदा से बने फास्ट फूड पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं।

महिलाओं की भूमिका : सशक्त महिला से सशक्त समाज

डॉ. आशा ने बताया कि महिला समाज की धुरी है। यदि महिलाएं पोषण के महत्व को समझें और परिवार के हर सदस्य के आहार में संतुलित भोजन शामिल करें, तो पूरा समाज स्वस्थ और सशक्त बनेगा। उन्होंने महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी और कहा कि यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कुपोषण की पहचान और जांच

कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग के संरक्षण अधिकारी और वृत्त पर्यवेक्षक तिलक राज ने बच्चों और महिलाओं का वजन तथा ऊंचाई मापकर कुपोषण की स्थिति की जांच की। उन्होंने महिलाओं को बीएमआई (Body Mass Index) का महत्व समझाया।

बीएमआई यह बताता है कि शरीर का वजन लंबाई के अनुसार संतुलित है या नहीं। इससे पता चलता है कि व्यक्ति सामान्य, कम वजन या अधिक वजन की श्रेणी में आता है। सही बीएमआई का होना स्वस्थ जीवन की निशानी है।

उन्होंने लोगों को यह भी बताया कि गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म और दो साल की उम्र तक सही खानपान और देखभाल पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसी अवधि में बच्चे की नींव सबसे मजबूत बनती है।

सही पोषण, देश रोशन

राष्ट्रीय पोषण माह का नारा है – “सही पोषण, देश रोशन”। तिलक राज ने बताया कि यह नारा केवल बच्चों और महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए महत्वपूर्ण है। जब परिवार में सभी सदस्य संतुलित आहार लेते हैं, तो बीमारियों की संभावना कम हो जाती है और आर्थिक बोझ भी घटता है।

पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी

कार्यक्रम में स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा पौष्टिक और पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें ऐसे व्यंजन शामिल थे जो घर पर आसानी से उपलब्ध सामग्री से बनते हैं और पोषण से भरपूर होते हैं।

पारंपरिक भोजन जैसे—

• बाजरे की रोटी

• दालें

• हरी सब्जियां

• दही

• स्थानीय फल


ये सभी शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखते हैं। आधुनिक फास्ट फूड की तुलना में पारंपरिक भोजन पचने में आसान और ज्यादा पौष्टिक होता है।

महिलाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान

इस कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान दिया गया क्योंकि यही समाज की नींव हैं। यदि बच्चे बचपन से ही संतुलित आहार लेते हैं, तो उनका शारीरिक और मानसिक विकास सही तरीके से होता है। वहीं, महिलाओं का स्वस्थ होना पूरे परिवार की खुशहाली का आधार है।

आंगनवाड़ी और महिला मंडल की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (सीमा, कंचन, अनीता, शालू) और महिला मंडल की सदस्याओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इससे यह साफ संदेश गया कि समाज की भागीदारी से ही कुपोषण जैसी समस्या को खत्म किया जा सकता है।

पोषण और जीवनशैली : कुछ महत्वपूर्ण सुझाव

1. रोज़ाना ताज़े फल और सब्जियों का सेवन करें।

2. अनाज में बाजरा, जौ और गेहूं का संतुलन रखें।

3. तेल और वसा की मात्रा कम करें।

4. मीठे पेय पदार्थ और अधिक चीनी से बचें।

5. प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक व्यायाम करें।

6. स्वच्छ पानी पिएं और स्वच्छता पर ध्यान दें।

7. नशे और तंबाकू उत्पादों से दूर रहें।

निष्कर्ष

हमीरपुर के ग्राम पंचायत चंगर में आयोजित यह कार्यक्रम एक प्रेरणा है कि सामुदायिक प्रयासों से कुपोषण को कम किया जा सकता है। डॉक्टरों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और महिला मंडल की संयुक्त भागीदारी ने यह संदेश दिया कि यदि हम चीनी, नमक, तेल और मैदे का उपयोग सीमित कर लें और संतुलित आहार को अपनाएं, तो स्वस्थ समाज और सशक्त भारत का निर्माण संभव है।

सही पोषण ही स्वस्थ जीवन और उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।

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