Kullu: अटल टनल मार्ग पर कंगनी नाले में आई भीषण बाढ़, 15 घंटे तक बंद रहा मनाली-लेह हाईवे

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हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में स्थित अटल टनल मार्ग पर बीती रात आई अचानक बाढ़ ने जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया। कंगनी नाले में रात को आई तेज बाढ़ के कारण मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग करीब 15 घंटे तक बंद रहा। बाढ़ का पानी और मलबा स्नो गैलरी में घुस गया, जिससे न केवल सड़क का एक बड़ा हिस्सा बह गया बल्कि पूरे क्षेत्र का यातायात भी ठप हो गया। इसके चलते मनाली और केलांग के बीच सीधा संपर्क पूरी तरह से टूट गया।

घटना के दौरान कंगनी नाले के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लाहौल की ओर से मनाली आ रही मटर की गाड़ियां भी बीच रास्ते में फंस गईं। जब सुबह तक सड़क बहाल होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आई, तो कई वाहन चालकों ने अपनी गाड़ियां वापस मोड़ लीं। कुछ वाहनों को अटल टनल के नार्थ पोर्टल से होते हुए कोकसर और फिर रोहतांग दर्रे के रास्ते मनाली की ओर भेजा गया। हालांकि बड़े ट्रक चालकों को मार्ग खुलने का इंतजार करना पड़ा।

सुबह होते ही बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) की टीम सड़क बहाली के काम में जुट गई। लेकिन बाढ़ से सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह बह चुका था, जिससे इसे ठीक करने में काफी समय लग गया। दोपहर करीब तीन बजे बीआरओ द्वारा मार्ग को एकतरफा बहाल कर दिया गया। मार्ग खुलने से वाहन चालकों ने राहत की सांस ली, हालांकि सिंगल लेन बहाली के कारण इलाके में जाम की स्थिति भी उत्पन्न हो गई।

इस पूरे घटनाक्रम में बीआरओ की योजक परियोजना का मुख्यालय भी कंगनी नाले के किनारे होने के कारण प्रभावित हुआ। हालांकि मुख्यालय को कोई भौतिक क्षति नहीं पहुंची, लेकिन बाढ़ के डर से बीआरओ के जवान पूरी रात सो नहीं सके। वहीं, सोलंग गांव के स्थानीय निवासी गोकल, रूप चंद और गुरदयाल ने बताया कि आधी रात को नाले से जबरदस्त आवाज सुनाई दी। उन्होंने बताया कि बाढ़ से ग्रामीण क्षेत्र में कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सड़क और स्नो गैलरी को खासा नुकसान पहुंचा है।

डीएसपी मनाली केडी शर्मा ने जानकारी दी कि दोपहर के बाद सड़क बहाल हो जाने से यातायात व्यवस्था दोबारा सुचारू कर दी गई है। बाढ़ के कारण जो वाहन फंसे हुए थे, वे अब अपने गंतव्यों की ओर रवाना हो चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सड़क बंद रहने के दौरान सभी वाहनों को पलचान से होकर कोकसर और फिर अटल टनल के नार्थ पोर्टल की ओर भेजा गया, ताकि यातायात प्रभावित न हो।

यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के समय आने वाली प्राकृतिक आपदाओं की गंभीरता को दर्शाती है, जहां थोड़ी सी बारिश भी बड़ी मुसीबत बन सकती है। हालांकि बीआरओ और प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया से स्थिति को नियंत्रण में लाया गया, लेकिन यह एक चेतावनी है कि आने वाले समय में और अधिक सतर्कता की आवश्यकता है।

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