सुलह विधानसभा क्षेत्र के विधायक और प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने शनिवार को लोक निर्माण विभाग के विश्रामगृह में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) पर फैली गलतफहमियों को दूर किया। उन्होंने कहा कि इस योजना को लेकर देशभर में चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यह योजना पूरी तरह जनहित में है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस योजना के माध्यम से ग्रामीण विकास और रोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने बताया कि देश की लगभग 75 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, इसके बावजूद पहले बजट का बड़ा हिस्सा शहरों पर खर्च होता था और गांवों को केवल 25 प्रतिशत हिस्सा मिल पाता था। मौजूदा सरकार ने इस असंतुलन को दूर करते हुए ग्रामीण विकास पर ज्यादा बजट खर्च करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को पहले की तरह ही 90:10 के अनुपात में केंद्र सरकार की सहायता मिलती रहेगी। सरकार ग्रामीण सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस बार इसके लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है और अब ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया गया है।
विपिन सिंह परमार ने यह भी कहा कि यदि किसी पात्र व्यक्ति को रोजगार नहीं मिलता है तो उसे भत्ता देने का प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल ही में मनरेगा का नाम बदलने को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है, लेकिन योजना आज भी ग्रामीण गरीबों के लिए सुरक्षा कवच बनी हुई है।
इस मौके पर नूरपुर से विधायक रणवीर सिंह निक्का, इंदौरा से पूर्व विधायक रीता धीमान, भाजपा संगठनात्मक जिला नूरपुर के अध्यक्ष राजेश काका, महामंत्री कुलदीप डोगर, सभ्य लहोटिया सहित भाजपा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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