कांगड़ा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं अस्पताल टांडा ने एक महीने के भीतर दो सफल किडनी ट्रांसप्लांट कर अहम उपलब्धि हासिल की है। इन दोनों प्रत्यारोपणों के साथ अस्पताल में अब तक सफल किडनी ट्रांसप्लांट की संख्या 29 हो गई है। इन मामलों में एक पति ने अपनी पत्नी को, जबकि चंबा जिले की एक बड़ी बहन ने अपनी छोटी बहन को किडनी दान कर नया जीवन देने में मदद की।
संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने बताया कि पहले मामले में महिला ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित थी और नेफ्रोलॉजी विभाग में उसका उपचार चल रहा था। बीमारी बढ़ने के कारण उसकी किडनी ने काम करना बंद कर दिया, जिसके बाद किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ी। इस मुश्किल समय में महिला के पति ने अपनी किडनी दान करने का फैसला लिया। मरीज की बेटी, जो स्वयं डॉक्टर है, ने भी ट्रांसप्लांट टीम के साथ समन्वय स्थापित किया।
दूसरा मामला चंबा जिले की एक महिला से जुड़ा है, जिसकी किडनी की बीमारी गंभीर होकर रीनल फेलियर तक पहुंच गई थी। महिला को हीमोडायलिसिस करवाना पड़ रहा था। ऐसे कठिन समय में उसकी बड़ी बहन ने किडनी दान करने का निर्णय लिया, जिससे छोटी बहन का प्रत्यारोपण संभव हो सका। इस दौरान परिवार को स्थानीय सामाजिक संगठनों से भी सहयोग मिला।
दोनों किडनी ट्रांसप्लांट प्रधानाचार्य डॉ. मिलाप शर्मा के मार्गदर्शन में किए गए। प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में रीनल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अमित शर्मा, नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अभिनव राणा के साथ सर्जरी, एनेस्थीसिया, नर्सिंग और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीम शामिल रही।
डॉ. मिलाप शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम होगी। टांडा अस्पताल का यह कार्यक्रम प्रदेश के मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।



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