1965 के युद्ध में 25 साल की उम्र में शहीद हुए कैप्टन रमेश चंद्र शर्मा, बलिदान दिवस पर गांव सदुं ने नम आंखों से किया नमन

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रैत। 1965 के भारत-पाक युद्ध में मातृभूमि की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वाले शाहपुर उपमंडल के गांव सदुं के वीर सपूत कैप्टन रमेश चंद्र शर्मा को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धापूर्वक याद किया गया। गांव सदुं में शहीद की स्मृति में बनाए गए स्मारक पर ग्रामीणों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और देश की रक्षा के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।

कैप्टन रमेश चंद्र शर्मा ने मात्र 25 वर्ष की आयु में देश की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की थी। उनकी वीरता और शहादत आज भी गांववासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। शहीद की पत्नी पुष्पा देवी ने उनकी स्मृति को संजोए रखने के लिए गांव में स्मारक का निर्माण करवाया है। इसी स्मारक पर हर वर्ष उनके बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि कैप्टन रमेश चंद्र शर्मा का बलिदान केवल गांव सदुं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देती रहेगी।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में विंग कमांडर अशोक शर्मा, रोटरी क्लब शाहपुर के अध्यक्ष करनैल चौहान, श्रीकांत लगवाल, सतीश शर्मा, बलदेव पठानिया, कमलेश चंद शर्मा, नसीब सिंह पठानिया, रणवीर सिंह जमवाल, अर्जुन सिंह पठानिया, केसर सिंह पठानिया, गुलबंत सिंह पठानिया, रविंद्र पठानिया, सुदर्शन सिंह पठानिया, संतोष जमवाल, पंजाब सिंह जमवाल, अनिल पठानिया, विजय जायसवाल, राजिंदर चौधरी, जगदीश चंद, राकेश जमवाल, हरबंस पठानिया, प्रदीप जमवाल, राजेंद्र चौधरी, सुखदेव पठानिया, भुवनेश शर्मा, दुनी चंद चौधरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

इस दौरान शहीदों के सम्मान में प्रसिद्ध पंक्तियां भी याद की गईं—

“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा।”

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