29 अप्रैल 2026: हिमाचल प्रदेश के शाहपुर क्षेत्र के झूल्हड़ गांव में शहीद पवन जरियाल की बरसी पर एक भावुक और गर्व से भरा माहौल देखने को मिला। इस मौके पर पहुंचे लोगों ने न सिर्फ शहीद को श्रद्धांजलि दी, बल्कि उनके बलिदान को याद करते हुए देशभक्ति की भावना भी महसूस की। गांव की उस मिट्टी में एक अलग ही शांति और गौरव का एहसास था, जहां से एक वीर सपूत ने जन्म लिया और देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
बताया जा रहा है कि आज ही के दिन पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए पवन जरियाल शहीद हो गए थे। उनकी शहादत की कहानी आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देती है, जब वे बिना अपनी जान की परवाह किए दुश्मनों के सामने डटकर खड़े रहे।
बरसी के दौरान गांव का माहौल भावुक जरूर था, लेकिन इसके साथ ही लोगों में एक अद्भुत साहस और गर्व भी देखने को मिला। इस दौरान शहीद के पिता गरजो राम, जो स्वयं एक पूर्व सैनिक हैं, से जब मुलाकात हुई तो उनका जज्बा हर किसी को प्रेरित कर गया। बेटे को खोने का दर्द होने के बावजूद उनकी आंखों में आंसू नहीं, बल्कि गर्व साफ नजर आ रहा था।
उन्होंने अपने बेटे की शहादत को देश के लिए सबसे बड़ा सम्मान बताया। उनके चेहरे पर निडरता और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था, जैसे वे कह रहे हों कि उनका बेटा देश के लिए गया है और इससे बड़ी कोई बात नहीं हो सकती। यह पल वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक रहा।
यह घटना एक बार फिर यह एहसास दिलाती है कि शहादत सिर्फ एक व्यक्ति का बलिदान नहीं होती, बल्कि पूरे परिवार के त्याग और समर्पण की कहानी होती है। एक पिता का गर्व उस दर्द से कहीं बड़ा होता है, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना मुश्किल है।
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