हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में इस शैक्षणिक सत्र से शुरू किए गए अंग्रेजी माध्यम के प्रयोग पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छठी कक्षा की पाठ्य पुस्तक ‘हिमाचल की लोक संस्कृति और योग’ के अंग्रेजी अनुवाद में मशीनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल इस तरह किया गया है कि कई जगहों पर अर्थ का पूरी तरह अनर्थ हो गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अनुवाद के बाद इन पुस्तकों की ठीक से प्रूफ रीडिंग तक नहीं करवाई गई, जिसके चलते गलतियों से भरी किताबें सीधे छात्रों तक पहुंच गईं।
पुस्तक में हुई गलतियां इतनी बड़ी हैं कि भूगोल और इतिहास तक प्रभावित हो गए हैं। उदाहरण के तौर पर, पृष्ठ संख्या 16 और 37 पर जिला किन्नौर का अनुवाद ‘ट्रांसजेंडर’ कर दिया गया है। एक प्रश्न में जिलों के गठन के बारे में पूछते हुए विकल्पों में बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू और डलहौजी के साथ ‘ट्रांसजेंडर’ शब्द भी शामिल कर दिया गया, जबकि हिंदी संस्करण में यहां सही शब्द ‘किन्नौर’ था। इसी तरह, पृष्ठ संख्या 37 पर दी गई सूची में भी किन्नौर की जगह ‘ट्रांसजेंडर’ छपा हुआ है।

सिर्फ नामों में ही नहीं, बल्कि आंकड़ों में भी बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं। पृष्ठ संख्या 17 पर वर्ष 1972 को ‘19712’ और पृष्ठ संख्या 43 पर 5302 को ‘53027’ के रूप में छापा गया है। इन गंभीर त्रुटियों से साफ जाहिर होता है कि पुस्तक के प्रकाशन से पहले किसी तरह की ठोस जांच या संपादन प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
अब इस पूरे मामले पर राजकीय टीजीटी कला संघ ने कड़ा विरोध जताया है। संघ के राज्य महासचिव विजय हीर ने कहा कि बिना जांचे-परखे एआई आधारित अनुवाद को सीधे किताबों में छापना शिक्षा व्यवस्था के साथ बड़ा खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि इस पुस्तक के अंग्रेजी अनुवाद की तुरंत समीक्षा की जाए और अगले सत्र से पहले सभी गलतियों को पूरी तरह सुधारा जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग उठाई कि स्कूलों में हिंदी माध्यम की पुस्तकें पर्याप्त संख्या में उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
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