जिला के अंतर्गत लोअर देहलां गांव की बेटी कारवां कौशल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका चयन स्लोवाकिया स्थित प्रतिष्ठित कोमेनियस यूनिवर्सिटी में रिसर्च साइंटिस्ट के रूप में हुआ है। यह विश्वविद्यालय यूरोप के सबसे पुराने और प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक है, जो विशेष रूप से चिकित्सा विज्ञान और मानविकी जैसे क्षेत्रों में उच्च शिक्षा और शोध के लिए जाना जाता है।
कारवां कौशल ने चंडीगढ़ स्थित सीएसआईआर रिसर्च लैब से पीएचडी पूरी करने के बाद यह उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एसएमवीपी स्कूल जखेड़ा से पूरी की और इसके बाद एसवीएसडी कॉलेज भटोली से फिजिक्स में ऑनर्स डिग्री प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से मास्टर ऑफ फिजिक्स की पढ़ाई की। उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के चलते उन्हें डीएसटी इंस्पायर स्कॉलरशिप भी प्राप्त हुई।
शिक्षा में शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें यूके और स्वीडन सहित कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने उच्च रैंकिंग और शोध अवसरों को देखते हुए स्लोवाकिया की कोमेनियस यूनिवर्सिटी को चुना।
कारवां कौशल ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने पिता पुष्पिंदर कौशल और माता मीना कुमारी को दिया है। उनके पिता एक किसान हैं और माता गृहिणी हैं। उन्होंने बताया कि सीमित आर्थिक साधनों के बावजूद उनके पिता ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उनकी पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी।
कारवां का कहना है कि उनका सपना एक ऐसे वैज्ञानिक के रूप में काम करना है जो भारत को डायबिटीज जैसी बीमारी से मुक्त करने में योगदान दे सके। देश में बढ़ते डायबिटीज मामलों को देखते हुए वे इस क्षेत्र में शोध कर समाधान निकालना चाहती हैं।
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