कुल्लू-लाहुल के ईको सेंसिटिव जोन में अवैध स्टोन क्रशरों का मामला NGT पहुंचा, पर्यावरण को नुकसान और करोड़ों के राजस्व घाटे का आरोप

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कुल्लू और लाहुल घाटी के ईको सेंसिटिव जोन में संचालित बताए जा रहे स्टोन क्रशरों का मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT पहुंच गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये क्रशर पिछले 15 से 20 वर्षों से चल रहे हैं और इनके संचालन को लेकर नियमों की अनदेखी की गई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन क्रशरों से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और राज्य सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। ईको सेंसिटिव जोन में कमर्शियल स्टोन क्वारिंग और क्रशिंग यूनिट्स को लेकर पर्यावरणीय नियमों में कड़े प्रावधान हैं। 

याचिका में धुंधी मनाली, बुरुआ मनाली, कुल्लू और लाहुल के केलिंग, चीका पाल्मो, खोखसर, ग्यु तथा स्पीति क्षेत्र में क्रशरों के संचालन का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि एक निजी कंस्ट्रक्शन कंपनी और उससे जुड़ी दूसरी कंपनी ने नियमों को ताक पर रखकर इन क्रशरों को स्थापित किया है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिना एम-फॉर्म के इन क्रशरों से बीआरओ को सामग्री की सप्लाई होती रही है और इससे सरकार को अनुमानित 3 से 500 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने का दावा किया गया है।

कंपनी प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए सर रोपड़ स्थित कार्यालय से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला और लैंडलाइन नंबर भी काम नहीं कर रहा था। वहीं, ऊपरी मनाली के लोगों ने आरोप लगाया है कि क्रशरों से निकलने वाली सिलिका डस्ट के कारण ब्यास और चंद्रा-भागा नदी का पानी दूषित हो रहा है।

प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कुल्लू सुनील शर्मा ने कहा कि मामला विभाग के ध्यान में है और संबंधित स्टोन क्रशर मालिकों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। अरण्यपाल वन विभाग कुल्लू संदीप ने कहा कि कुल्लू के अंतर्गत आने वाले स्टोन क्रशरों के संबंध में डीएफओ कुल्लू को जांच के आदेश दिए जाएंगे। वहीं, लाहुल से जुड़े मामले को डीएफओ केलांग देखेंगे।

कंस्ट्रक्शन कंपनी पर गंभीर आरोप

याचिकाकर्ता और हिमालयन पर्यावरण संरक्षण संस्था के अध्यक्ष अभिषेक राय ने NGT में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि एक कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा कुल्लू और लाहुल के संरक्षित वन क्षेत्रों तथा ईको सेंसिटिव जोन में आठ स्टोन क्रशर अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं। याचिका के अनुसार, इन क्रशरों के पास वन विभाग की वैध लीज और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की NOC नहीं है।

याचिका में मांग की गई है कि भूमि, पर्यावरण और सरकार को हुए नुकसान की भरपाई संबंधित कंपनी से कराई जाए। इसके साथ ही पूरे मामले की संयुक्त जांच कराने और कथित अवैध स्टोन क्रशरों को तत्काल बंद करने की मांग भी की गई है।

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