जिला उपभोक्ता विवाद आयोग कांगड़ा ने मुख्यमंत्री नूतन पॉलीहाउस परियोजना के तहत लगाए गए पॉलीहाउस में घटिया सामग्री के इस्तेमाल के मामले में एमएस ग्रीन टैक एग्री सैक्टर प्राइवेट लिमिटेड को दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी पर सख्त रुख अपनाते हुए किसान को मुआवजा देने और सरकार को सब्सिडी राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश जारी किए हैं। यह फैसला किसानों के हित में एक अहम मिसाल माना जा रहा है।
आयोग के समक्ष दायर उपभोक्ता शिकायत में शाहपुर निवासी किसान आशीष सागर ने आरोप लगाया था कि उनकी जमीन पर लगाए गए पॉलीहाउस में घटिया क्वालिटी की पॉलीशीट और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया। शिकायत के अनुसार पहली ही बारिश और तेज हवाओं में पॉलीशीट फट गई, जिससे खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई और किसान को भारी नुकसान झेलना पड़ा।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ और राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला जुन्गा की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया कि पॉलीहाउस में इस्तेमाल की गई पॉलीशीट की मोटाई और मजबूती सरकारी मानकों के अनुरूप नहीं थी। जांच में यह भी सामने आया कि जिस पॉलीशीट को 200 माइक्रोन बताया गया था, उसकी वास्तविक मोटाई लगभग आधी पाई गई, जिससे सामग्री को घटिया और मानकों से कमतर माना गया।
कंपनी की ओर से नुकसान के लिए प्राकृतिक आपदा को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की गई, लेकिन आयोग ने इस दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि कंपनी ने न सिर्फ घटिया सामग्री का उपयोग किया, बल्कि वारंटी अवधि के दौरान मरम्मत और पॉलीशीट बदलने में भी लापरवाही बरती। इसे सेवा में गंभीर कमी माना गया है।
अपने आदेश में उपभोक्ता आयोग ने ग्रीन टैक एग्री सैक्टर को निर्देश दिए कि वह सरकार द्वारा जारी की गई 18,74,658 रुपये की सब्सिडी राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित कृषि विभाग को लौटाए। इसके साथ ही शिकायतकर्ता किसान आशीष सागर को 5 लाख रुपये का मुआवजा अदा करने, 3 लाख रुपये दंडात्मक हर्जाना और 20 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में चुकाने के आदेश दिए गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 90 और 91 के तहत कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक कांगड़ा को आदेश भेजने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा आयोग ने कृषि विभाग के अधिकारियों को भविष्य में पॉलीहाउस निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता की सख्त जांच सुनिश्चित करने और अन्य किसानों की शिकायतों से जुड़े नमूनों को भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजने के निर्देश जारी किए हैं।
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