Kangra: 33 साल की कानूनी लड़ाई के बाद बंद हुआ इंदौरा-पठानकोट मार्ग, अब दर्जनों गांवों के लोगों की बढ़ी मुश्किलें

इंदौरा-पठानकोट वाया डाहकुलाड़ा-मोहटली मार्ग को भूमि मालिक ने बंद कर दिया है, जिससे क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भूमि मालिक ने मुख्य मार्ग पर तारबंदी करने के साथ-साथ मिट्टी के ढेर लगाकर रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया है। इस फैसले के बाद भपू से मोहटली तक के दर्जनों गांवों के लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है। इतना ही नहीं, आपात स्थिति में रेल विभाग द्वारा बनाए गए अंडरब्रिज का लाभ भी अब स्थानीय लोग नहीं ले सकेंगे। यह कार्रवाई माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अनुपालना में की गई है।

जानकारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग ने वर्षों पहले विकास कार्यों के तहत रघुबीर सिंह पुत्र प्रीतम सिंह निवासी गांव महाल, मौजा मोहटली, तहसील इंदौरा, जिला कांगड़ा की खसरा नंबर 904, 905 और 908 की निजी भूमि पर सड़क का निर्माण कर दिया था, लेकिन भूमि का कोई मुआवजा नहीं दिया गया। इसके बाद रघुबीर सिंह ने वर्ष 2012 में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी इंदौरा की अदालत में मुआवजे के लिए मामला दायर किया। वर्ष 2017 में अदालत ने रघुबीर सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए लोक निर्माण विभाग को उचित मुआवजा देने के आदेश दिए, लेकिन विभाग ने भुगतान नहीं किया।

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इसके बाद विभाग ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय नूरपुर में अपील दायर की, जिसे वर्ष 2019 में खारिज कर दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि यदि मुआवजा नहीं दिया गया तो विभाग की संपत्ति अटैच की जा सकती है। इसके बाद मामला वर्ष 2020 में उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां वर्ष 2023 में भी विभाग की अपील खारिज कर दी गई। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि या तो भूमि का उचित मुआवजा दिया जाए या फिर भूमि का कब्जा मालिक को लौटाया जाए।

वादी पक्ष के अधिवक्ता नितिश बैहल ने बताया कि विभाग द्वारा न तो मुआवजा दिया गया और न ही कब्जा लौटाया गया। इसके बाद न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी इंदौरा की अदालत में दखल वारंट याचिका दायर की गई। 2 जून 2026 को अदालत ने भूमि वापस देने के आदेश जारी किए और शुक्रवार को पुलिस की मौजूदगी में रघुबीर सिंह को उसकी भूमि का कब्जा सौंप दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी भूमि पर रास्ता बंद कर दिया।

मार्ग बंद होने का असर केवल आम लोगों पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि मलोट स्थित औद्योगिक क्षेत्र का यातायात भी पूरी तरह प्रभावित हुआ है। उद्योगों की उत्पादन और परिवहन गतिविधियां बाधित हो गई हैं। ऐसे में क्षेत्र के लोगों ने सरकार से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।

रघुबीर सिंह ने बताया कि वह पिछले 33 वर्षों से अपनी पुश्तैनी जमीन के मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस दौरान उन्हें कई सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़े और कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। उन्होंने बताया कि अब तक इस पूरे मामले में उनका लगभग 18.50 लाख रुपये खर्च हो चुका है।

हालांकि, रघुबीर सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें आम जनता की परेशानी का एहसास है। यदि सरकार उन्हें उचित मुआवजा देती है तो वह सड़क के लिए भूमि देने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि सरकार मुआवजा नहीं दे सकती तो उन्हें इस मार्ग पर टोल लगाने की अनुमति दी जाए। ऐसी स्थिति में भी वह रास्ता खोलने को तैयार हैं।

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